गुजरात हाई कोर्ट की आलोचकों को नसीहत

गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की आलोचना करने वालों को नसीहत दी है। अदालत ने पीआईएल करने वालों और विपक्षी पार्टियों को भी नसीहत दी है और उनसे कहा है कि संकट के इस समय में सरकार की आलोचना नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने कहा है कि इस समय सरकार की आलोचना करने की बजाय सहयोग या मदद करने के लिए आगे आना ज्यादा बेहतर काम है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट ने दस दिन पहले कोरोना वायरस के संक्रमितों की टेस्टिंग और उनके इलाज को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि सरकार जान बूझकर संक्रमण के मामले कम दिखा रही है और अहमदाबाद का सिविल अस्पताल कालकोठरी से भी बदतर है। पर उसके बाद अचानक हाई कोर्ट का रुख बदल गया। सवाल है कि ऐसा हो गया कि अचानक इतना बड़ा बदलाव आ गया?

असल में पहली टिप्पणी करने वाली बेंच में जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस इलेश शाह थे। पर 29 मई को दोबारा होने वाली सुनवाई से बेंच बदल कर जस्टिस शाह को हटा दिया गया और खुद चीफ जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता में नई बेंच बनी, जिसने पीआईएल पर आगे सुनवाई की। चीफ जस्टिस की बेंच ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के कामकाज की तारीफ की और पीआईएल करने वालों से लेकर विपक्षी पार्टियों तक को नसीहत दी।

हाई कोर्ट ने कहा कि जो संकट के समय मदद नहीं कर सकते है उन्हें आलोचना करने का अधिकार नहीं है, अगर राज्य सरकार कुछ नहीं कर रही होती तो संभवतः हम सब मर गए होते। अदालत ने सरकार की तारीफ करते हुए आगे कहा कि सिर्फ कमी बताने से लोगों के दिमाग में डर बैठेगा। अदालत ने यह भी कहा कि राजनीतिक फायदे के लिए जनहित याचिका यानी पीआईएल नहीं दाखिल होनी चाहिए। अदालत ने बताया कि कोविड मानवीय संकट है, राजनीतिक नहीं। विपक्ष को नसीहत देते हुए अदालत ने कहा कि उसका रोल अहम है पर ऐसे समय में आलोचना की बजाय अगर विपक्ष मदद करे तो बेहतर होगा।

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