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भाग्य भरोसे कांग्रेस ने चुनाव लड़ा था

Congress political crisis delhi

कोई राष्ट्रीय पार्टी या उसके नेता कैसे भ्रम का शिकार हो सकते हैं यह गुजरात चुनाव में कांग्रेस की राजनीति से साबित हुआ है। चुनाव प्रचार की शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक सभा में भाजपा कार्यकर्ताओं से कह दिया कि वे सावधान रहें क्योंकि कांग्रेस दिख नहीं रही है पर गांवों में उसका प्रचार हो रहा है और उसके कार्यकर्ता घर घर जा रहे हैं। असल में ऐसा कुछ नहीं हो रहा था। लेकिन कांग्रेस नेताओं ने इस बात को सच मान लिया। वैसे ही जैसे कोई कहे कि कौआ कान ले गया तो आप कान देखने की बजाय मानने लगें कि कौआ कान ले गया। कांग्रेस कहीं चुनाव नहीं लड़ रही थी। उसके पास न नेता था, न संगठन था और न कोई प्रचार का तंत्र था। इसके बावजूद कांग्रेस नेता इस भ्रम में बैठे रहे कि गांवों में उनका प्रचार हो रहा है।

कांग्रेस नेताओं ने यह भी नहीं सोचा कि कौन प्रचार कर रहा है, कौन उनका नेतृत्व कर रहा है, नेता कौन है, स्टार प्रचारक कौन है, बस सब मानते रहे कि प्रचार हो रहा है। असल में गुजरात में कांग्रेस के पास कोई नेता नहीं था। यहां तक कि कांग्रेस ने गुजरात में चुनाव अभियान समिति का गठन तक नहीं किया था। प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल का नेता ऐसे लोगों को बनाया गया था, जिनकी पूरे गुजरात में पहचान नहीं थी। उनसे पहले भी प्रयोग के तौर पर दो ऐसे लोगों को अध्यक्ष और नेता विपक्ष बनाया गया था, जो अपने क्षेत्र से बाहर के लोगों के लिए अनजान थे। गुजरात के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनकी सरकार में मंत्री रहे रघु शर्मा के सहारे पार्टी चुनाव में उतरी थी। लेकिन पार्टी ने ही गहलोत को राजस्थान की अंदरूनी राजनीति में उलझा रखा था। सो, कांग्रेस जितनी भी सीटें आई हैं या जितना भी वोट मिला है वह भाग्य और उम्मीदवारों की अपनी मेहनत से मिल गया है या कुछ मजबूर मतदाताओं की कृपा से मिल गया है।

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