politics social engineering bjp भाजपा को सोशल इंजीनियरिंग का सहारा
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भाजपा को सोशल इंजीनियरिंग का सहारा

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गुजरात के प्रयोग के बाद यह कहा जा रहा था कि भाजपा अब हिंदुत्व की बजाय सोशल इंजीनियरिंग की राजनीति पर ज्यादा ध्यान दे रही है। गुजरात में पिछला चुनाव भाजपा ने जैन वैश्य समाज का विजय रुपाणी के चेहरे पर लड़ा था और बड़ी मुश्किल से जीत पाई थी। सो, इस बार चुनाव से पहले उनको हटा दिया गया और राज्य के सबसे मजबूत जातीय समूह पाटीदार के नेता भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी मंत्रिपरिषद के विस्तार में भी यहीं संकेत दिया था। बड़ी शान से सरकार की ओर से बताया गया कि रिकार्ड संख्या में ओबीसी और एससी-एसटी मंत्री बनाए गए हैं। मोदी सरकार में उत्तर प्रदेश से छह मंत्री शामिल किए गए थे, जिनमें से एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी और दो एससी समुदाय के थे। politics social engineering bjp

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इसी बात को योगी आदित्यनाथ सरकार के विस्तार में लागू कर दिया है। लंबी जद्दोजहद के बाद योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया तो कार्यक्षमता, जमीनी लोकप्रियता या पार्टी के साथ पुराने जुड़ाव की बजाय जातीय समीकरण के हिसाब से मंत्री चुने। कांग्रेस छोड़ कर हाल ही में भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद को मंत्री बनाया गया छह नए मंत्री बनाए गए, जिनमें से एक ब्राह्मण, तीन ओबीसी, दो एससी और एक एसटी समुदाय के हैं। तीन ओबीसी मंत्रियों में से तीनों गैर यादव अन्य पिछड़ी जातियों के हैं तो एससी समुदाय के दो मंत्री भी गैर जाटव से हैं। इससे ऐसा लग रहा है कि हिंदुत्व की राजनीति करने वाली भाजपा मान कर चल रही है कि यादव भाजपा की बजाय सपा को वोट करेंगे और जाटव बहुजन समाज पार्टी के साथ जाएंगे। जातियों को इस तरह से छांट कर हिंदुत्व की राजनीति कैसे होगी?

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