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आजाद की जगह कौन बनेगा नेता?

कांग्रेस पार्टी को फैसला करना है कि राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद की जगह सदन में कांग्रेस का नेता कौन होगा। कायदे से कांग्रेस को यह फैसला पहले से कर लेना चाहिए था क्योंकि सबको पता है कि आजाद 15 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं और उनके कहीं से भी राज्यसभा में आने की गुंजाइश नहीं है। जम्मू कश्मीर के सभी चार सदस्यों में से दो 10 फरवरी को रिटायर हो गए और दो 15 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं। जम्मू कश्मीर में इस समय विधानसभा नहीं है इसलिए ये चारों सीटें खाली रहेंगी। अहमद पटेल और अभय भारद्वाज के निधन से खाली हुई गुजरात की दो राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव हैं पर वहां की दोनों सीटें भाजपा के खाते में जाएंगी। सो, आजाद के लिए अगले साल अप्रैल में होने वाले दोवार्षिक चुनावों से पहले कहीं से गुंजाइश नहीं है। इसलिए उनके रिटायर होने से पहले ही नेता का नाम तय हो जाना चाहिए था। पर कांग्रेस में फैसले इतनी आसानी से नहीं होते।

गुलाम नबी आजाद की राज्यसभा से औपचारिक विदाई भी हो गई है पर कांग्रेस आलाकमान ने कोई नाम तय नहीं किया है। ध्यान रहे बजट सत्र का पहला हिस्सा 13 फरवरी तक चलेगा और आजाद की कार्यकाल 15 फरवरी तक है। इसलिए उस समय तक उनका नाम चलता रहेगा। 13 फरवरी से आठ मार्च तक के अवकाश के बीच कांग्रेस पार्टी नए नेता का नाम तय कर सकती है। हालांकि उसमें भी कांग्रेस के अनेक नेताओं को संदेह है। उनको लग रहा है कि संसद के बजट सत्र में हो सकता है कि नियुक्ति न हो और सदन के उप नेता आनंद शर्मा के जरिए काम चलाया जाए। आठ अप्रैल को बजट सत्र खत्म होने के बाद ही नया नेता नियुक्त हो। अगर ऐसा होता है तो तय मानें कि नेता की नियुक्ति और टलेगी। फिर पांच राज्यों के चुनाव और जून में कांग्रेस के नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद ही उच्च सदन का नेता नियुक्त होगा।

लेकिन अगर कांग्रेस नियुक्तियों को लटकाए रखने की अपनी पुरानी परंपरा से हट कर बजट सत्र के बीच ही नेता का नाम तय करती है तो सवाल है कि कौन होगा नेता? सदन के उप नेता के नाते आनंद शर्मा स्वाभाविक दावेदार हैं। लेकिन पिछली लोकसभा में निचले सदन के नेता रहे मल्लिकार्जुन खड़गे अब उच्च सदन में हैं इसलिए उनकी दावेदारी को खारिज नहीं किया जा सकता है। वे दलित समुदाय से आते हैं इस नाते भी उनको बना कर कांग्रेस एक मैसेज दे सकती है। दक्षिण भारत से दूसरा नाम पी चिदंबरम का है। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मुकदमे चल रहे हैं और वे जेल काट कर आए हैं पर कांग्रेस इसे राजनीतिक मुद्दा मानती हैं। उनको बनाने का फायदा अप्रैल-मई में होने वाले तमिलनाडु चुनाव में मिल सकता है। इस तात्कालिक फायदे से इतर अगर कांग्रेस पार्टी सोचती है तो दो बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह भी उच्च सदन में नेता पद के प्रबल दावेदार होंगे। इन चार के अलावा कोई चौंकाने वाला नाम कांग्रेस की सूची में नहीं है।

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