हरियाणा में बढ़ सकता है विवाद

हरियाणा में कांग्रेस के नेता दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजों तक इंतजार करेंगे। पार्टी के जानकार सूत्रों के मुताबिक अगर दिल्ली के चुनाव में भाजपा हारती है तो हरियाणा में भाजपा की सरकार को अस्थिर करने का प्रयास होगा। वह कैसे होगा, इस बारे में पार्टी के नेता बहुत भरोसे से कोई रणनीति नहीं बता पा रहे हैं। पर उम्मीद लगाए बैठे हैं कि महाराष्ट्र और झारखंड में सरकार गंवाने के बाद अगर भाजपा दिल्ली में सत्ता नहीं हासिल कर पाती है तो वह कमजोर होगी, जिसका फायदा कांग्रेस को होगा। एक रणनीति तो भाजपा को समर्थन दे रही जननायक जनता पार्टी को अलग करके कांग्रेस के साथ लाने की होगी। पर इसमें मुश्किल यह है कि कांग्रेस को जजपा नेता दुष्यंत चौटाला को मुख्यमंत्री बनाना होगा।

तभी ऐसा लग रहा है कि दूसरी रणनीति पर काम शुरू हो गया है। जजपा के विधायक राजकुमार गौतम ने पार्टी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर तीखा हमला किया है। गौतम को कांग्रेस नेता भूपेंदर सिंह हुड्डा का करीबी माना जाता है। तभी कहा जा रहा है कि चौटाला की पार्टी में फूट डाल कर उसमें टूट फूट कराने का प्रयास हो सकता है। यह वैकल्पिक रणनीति है। पहली रणनीति यह है कि चौटाला को अलग करके कांग्रेस उन्हें समर्थन दे और उनकी सरकार बनवाए। दूसरी यह है कि चौटाला ही जाट मुख्यमंत्री बनाने के लिए हुड्डा को नेता मानें और उनके साथ आकर उनको मुख्यमंत्री बनाएं और तीसरी यह है कि चौटाला की पार्टी में टूट फूट हो, भाजपा के एकाध विधायकों का इस्तीफा हो और अन्य के साथ मिल कर हुड्डा सरकार बनाएं। जो हो दिल्ली के चुनाव में अगर भाजपा नहीं जीती तो हरियाणा में ऐसा कोई कमाल हो सकता है।

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