रावत कितने दिन पंजाब में प्रभारी रहेंगे?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने संगठन में फेरबदल की तो कुछ बड़ी अजीबोगरीब नियुक्तियां कीं, जैसे उत्तराखंड के पूर्व मुख्य्मंत्री हरीश रावत को पंजाब का प्रभारी बना दिया। वे पहले असम के प्रभारी थे, जहां अगले साल अप्रैल-मई में चुनाव होने वाला है। माना जा रहा था कि रावत अप्रैल-मई के विधानसभा चुनाव के बाद उत्तराखंड वापस लौट जाएंगे और पार्टी को 2022 का विधानसभा चुनाव लड़वाएंगे। ध्यान रहे उत्तराखंड में कांग्रेस के पास उनके कद का दूसरा कोई नेता नहीं है। कांग्रेस ने जिन दो नेताओं- विजय बहुगुणा और सतपाल महराज को आगे बढ़ाया था वे दोनों भाजपा में चले गए हैं। सो, यह बड़ी हैरानी की बात थी कि असम के चुनाव से ठीक पहले हरीश रावत को वहा से हटा दिया गया और पंजाब का प्रभारी बना दिया गया, जहां उत्तराखंड के साथ ही विधानसभा चुनाव होना है।

अब सवाल है कि हरीश रावत पंजाब में कांग्रेस को चुनाव लड़वाएंगे या उत्तराखंड जाकर खुद चुनाव लडेंगे और पार्टी को लड़वाएंगे? रावत संभवतः इस नियुक्ति से खुश नहीं हैं क्योंकि विवादित कृषि विधेयकों को लेकर पंजाब में हंगामा मचा है और कांग्रेस के प्रभारी महासचिव का अता पता नहीं है। वैसे भी पंजाब की राजनीति में प्रभारियों का कोई खास मतलब नहीं होता है। मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह सीधे सोनिया और राहुल गांधी से बात करते हैं। तभी कांग्रेस के जानकार सूत्रों का कहना है कि पंजाब में जल्दी ही बदलाव हो सकता है। संभव है कि दूसरे दौर की फेरबदल में रावत को प्रभारी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया जाए। वे खुद भी इसके लिए दबाव बनाएंगे। पिछली फेरबदल में एक और अजीब नियुक्ति राजीव शुक्ला को हिमाचल प्रदेश का प्रभारी बनाने की है। सबको पता है कि क्रिकेट की राजनीति में राजीव शुक्ला और अनुराग ठाकुर एक साथ हैं। अनुराग ठाकुर के भाई अभी भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के कोषाध्यक्ष हैं, जिसके साथ राजीव शुक्ला भी जुड़े हैं। यह भी सबको पता है कि अगले चुनाव में अनुराग ठाकुर बडी भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में कांग्रेस प्रभारी क्या कैसे काम करेंगे?

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