जीएसटी कौंसिल में कैसे सहमति बनेगी? - Naya India
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जीएसटी कौंसिल में कैसे सहमति बनेगी?

जीएसटी कौंसिल की पिछली बैठक आठ महीने के बाद हुई थी। यह बैठक इस लिहाज से बहुत जरूरी थी कि इसमें चिकित्सा उपकरणों, कोरोना के इलाज में इस्तेमाल हो रही दवाओं और वैक्सीन के ऊपर लगने वाले जीएसटी को खत्म करने पर विचार किया जाना था। बैठक में यह मुख्य मुद्दा था लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी। कई घंटे तक चली बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री और जीएसटी कौंसिल की अध्यक्ष निर्मला सीतारमन यह समझाती रहीं कि जीएसटी शून्य कर दिया जाएगा को कंपनियां इनपुट क्रेडिट का दावा नहीं कर पाएंगी यानी कच्चे माल की खरीद पर मिलने वाला लाभ उनको नहीं मिल पाएगा और इसलिए उपभोक्ताओं को ज्यादा फायदा नहीं होगा। दूसरी ओर विपक्षी शासन वाले राज्यों के वित्त मंत्री इस बात पर अड़े रहे कि टैक्स शून्य किया जाए।

सहमति नहीं बनी तो कौंसिल ने एक कमेटी बना कर इस पर विचार करने और रिपोर्ट देने को कहा। मेघालय के मुख्यमंत्री कोनरेड संगमा को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया। यह भी समझ से परे है कि किसी बड़े राज्य के वित्त मंत्री की बजाय मेघालय के मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री को कमेटी का अध्यक्ष क्यों बनाया गया? उससे भी ज्यादा समझ में नहीं आने वाली बात यह है कि इस कमेटी में कांग्रेस शासित तीन राज्यों में से किसी के वित्त मंत्री को शामिल नहीं किया गया। यहां तक कि जीएसटी कौंसिल की बैठक में सबसे मुखर रहे तमिलनाडु के वित्त मंत्री पलानीवेल त्यागराजन और आर्थिक मामलों की समझ रखने वाले पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा भी शामिल नहीं किया गया।

इस कमेटी में पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के सदस्य नहीं हैं। तभी सवाल है कि इसकी सिफारिशों पर अगली बैठक में कैसे सहमति बनेगी? ध्यान रहे इन पांच राज्यों के वित्त मंत्री बैठक में सबसे ज्यादा मुखर रहे और इन पांचों राज्यों के मुख्यमंत्री भी कई बार कह चुके हैं कि सरकार को चिकित्सा उपकरणों, दवाओं और वैक्सीन के ऊपर लगने वाला टैक्स खत्म करना चाहिए। सो, जाहिर है कि अगर कमेटी इस बात की सिफारिश नहीं करती है तो कौंसिल की बैठक में विवाद होगा।

वैसे इस कमेटी में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री अजित पवार को शामिल किया गया है। ध्यान रहे महाराष्ट्र सरकार भी टैक्स खत्म करने की मांग कर रही है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि कमेटी की बैठकों में टैक्स प्रावधान को लेकर गंभीरता से चर्चा होगी और कोई न कोई रास्ता निकाला जाएगा ताकि लोगों पर पड़ने वाला बोझ कम किया जाए। लेकिन मुश्किल यह है कि केंद्र सरकार टैक्स हटाने के पक्ष में नहीं है। तभी ऑक्सीजन उपकरणों पर लगने वाले आईजीएसटी को बरकरार रखवाने के लिए सरकार सुप्रीम कोर्ट तक गई और इस टैक्स को असंवैधानिक बताने वाले हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। सो, जीएसटी कौंसिल की अगली बैठक में सहमति बनाना आसान नहीं होगा।

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