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Sunday, April 18, 2021
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हुड्डा को चाहिए पूरा हरियाणा

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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को पूरा हरियाणा चाहिए। वे कांग्रेस विधायक दल का नेता बन कर संतुष्ट नहीं हैं या इस बात से भी संतुष्ट नहीं हैं कि राज्य की इकलौती राज्यसभा की सीट उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा को मिल गई। कांग्रेस आलाकमान की करीबी और दिवंगत अहमद पटेल के बेहद नजदीक रहीं प्रदेश अध्यक्ष कुमारी शैलजा की सीट खाली हुई थी और कायदे से उनको दूसरी बार यह सीट मिलनी थी पर हुड्डा ने दबाव बना कर विधायकों की बगावत का भय दिखा कर सीट अपने बेटे के लिए ले ली।

उससे पहले दोनों पिता-पुत्र लोकसभा का चुनाव हार चुके थे। कांग्रेस की राज्य की 10 में से एक भी लोकसभी सीट नहीं मिली। विधानसभा में जरूर कांग्रेस 31 सीट जीती पर वह भाजपा की मनोहर लाल खट्टर सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी थी, जिसकी वजह से कांग्रेस ने उतनी सीटें जीती। खट्टर सरकार से नाराजगी और भाजपा की गैर जाट वोट की राजनीति के कारण ही पहली बार पार्टी बना कर चुनाव लड़े दुष्यंत चौटाला को भी विधानसभा चुनाव में 10 सीटें मिल गई थीं। सो, अगर कांग्रेस को 31 सीट आ गई तो वह कोई कमाल की बात नहीं थी।

बहरहाल, अब हुड्डा चाहते हैं कि पार्टी उनको मुख्यमंत्री बनाने की हरी झंडी दे। हालांकि वे अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं पर बात बन नहीं रही है। उनके तमाम प्रयास के बावजूद दुष्यंत चौटाला की पार्टी का एक भी विधायक कांग्रेस के साथ नहीं आया है। एक निर्दलीय विधायक ने जरूर सरकार से समर्थन वापस लेकर कांग्रेस का साथ दिया है पर कांग्रेस को सरकार बनाने के लिए 15 विधायकों की जरूरत है, जिसके मिलने की संभावना नहीं के बराबर है।

तभी यह भी कहा जा रहा है कि हुड्डा इस फिराक में हैं कि भले अभी सरकार नहीं बने पर कांग्रेस आलाकमान पर ऐसा दबाव बनाया जाए कि अगले चुनाव में वे और उनके बेटे ही कांग्रेस की कमान संभाले रहें। तभी कहा जा रहा है कि वे अपने बेटे दीपेंद्र हुड्डा को प्रदेश अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान उनके बेटे को अध्यक्ष बना सकता है पर उसके लिए खुद हुड्डा को विधायक दल के नेता का पद छोड़ना होगा। कांग्रेस पार्टी दोनों पद जाट को नहीं दे सकती है और पिता-पुत्र को तो बिल्कुल नहीं। कांग्रेस के एक जानकार नेता का कहना है कि हुड्डा कांग्रेस पार्टी को हरियाणा में प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाना चाहते हैं। कांग्रेस ऐसा नहीं करती है तो वे पाला बदलने के लिए तैयार हैं। तभी वे कांग्रेस के बागी नेताओं के साथ खूब घनिष्ठता दिखा रहे हैं और उनके हर कार्यक्रम में उनके साथ दिख रहे हैं। कांग्रेस आलाकमान के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने वालों में हुड्डा अकेले हैं, जिनका जनाधार है और जिनके पास साधन हैं। यह भी कहा जा रहा है कि बगावत की फंडिंग भी वे ही कर रहे हैं।

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