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कोई फर्क नहीं पड़ता तो क्यों कैबिनेट बनाना?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा है कि मंत्रिमंडल का गठन नहीं करने से राज्य सरकार के कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। उन्होंने कहा कि कोई भी काम रूक नहीं रहा है और सरकार सुचारू रूप से काम कर रही है। सवाल है कि जब दो लोगों की सरकारी ही सुचारू रूप से काम कर रही है तो पूरी सरकार बनाने की क्या जरूरत है? दो लोगों की सरकार में भी कोई काम रूक नहीं रहा है तो फिर क्यों 43 लोगों की सरकार बनानी है? अगर मंत्रिमंडल का विस्तार होगा और 43 लोग मंत्री बनेंगे तो उनके साथ कई लोगों की टीम बनेगी, मंत्रियों के दफ्तर बनेंगे, उनके कर्मचारी होंगे और मंत्रालय का खर्च होगा, इन सबकी क्या जरूरत है?

ज्यादा लोग मंत्री होंगे तो सरकार के लिए उनके कामकाज में तालमेल बैठाना भी मुश्किल होगा। अलग अलग मंत्रालयों में समन्वय करना मुश्किल होगा। एक मंत्रालय की फाइल दूसरे में जाकर अटकी रहेगी। पार्टी में भी कोई होड़ नहीं रहेगी। मंत्री बनने की प्रतिस्पर्धा ही खत्म हो जाएगी. सो, बेहतर है कि दो लोग ही सरकार चलाएं और मंत्रालय उन्हीं लोगों के बीच रहे। पिछले एक महीना नौ दिन से महाराष्ट्र में दो लोगों की सरकार चल रही है। मुख्यमंत्री कह भी रहे हैं कि कोई दिक्कत नहीं है सब काम सुचारू रूप से चल रहा है। विपक्ष के लोगों के पेट में बेवजह दर्द हो रहा है। बहरहाल, एक दूसरा मॉडल ममता बनर्जी का है, जिनके एक मंत्री गिरफ्तार हुए और एक मंत्री का निधन हुआ तो उन्होंने तत्काल मंत्रिमंडल का विस्तार किया और कहा कि वे चार-पांच मंत्रालयों के काम एक साथ नहीं संभाल सकतीं। उनको एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फड़नवीस से सीखना चाहिए कि कैसे दो-दो दर्जन मंत्रालय संभाले जाते हैं।

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