लॉकडाउन में नकदी का बढ़ा जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी का ऐलान किया था। उस समय भारत में करीब 18 लाख करोड़ रुपए की नकदी थी, जिसमें 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सा पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट का था। ये सारे नोट रद्दी कर दिए गए थे। मकसद बताया गया था कि भारत में काले धन की अर्थव्यवस्था को खत्म करना है। हालांकि बाद में तेजी से गोलपोस्ट बदलते गए और अंतिम लक्ष्य यह समझ में आया कि देश में लेस कैश की या कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देना है। इसके लिए कई ऐप वगैरह लांच किए गए और बड़े जोश-खरोश से इसका प्रचार किया गया।
ऐसा लग रहा था कि कोरोना वायरस का संकट बढ़ा है और सब लोग घरों में बंद हैं तो कैशलेस अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी पर असल में इसका उलटा हुआ है। रिजर्व बैंक ने बताया है कि भारत में कोरोना वायरस के संकट के बीच कैशलेस की बजाय नकदी की अर्थव्यवस्था और बढ़ गई है। एक अप्रैल से 22 मई के बीच लोगों ने एक लाख 35 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की नकदी बैंकों से निकाली है। लोगों ने ई-कॉमर्स की बजाय स्थानीय दुकानदारों पर ज्यादा भरोसा दिखाया है और उनसे नकद देकर खरीद की है। पिछले साल भारत में नकदी का चलन 14 फीसदी की रफ्तार से बढ़ा था, जबकि इस साल 19 फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आएगी। इसका एक कारण तो यह है कि लोगों का नकदी पर भरोसा बढ़ रहा है और दूसरा कारण यह है कि बैंकों पर भरोसा घट रहा है। इस बीच यह भी खबर आई है कि तीन सरकारी बैंकों का निजीकरण करने की योजना है।

बहरहाल, जिस दिन नोटबंदी हुई थी उस दिन बाजार में कुल नकदी 18 लाख करोड़ रुपए की थी और आज रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक यह 25 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई है। अप्रैल से मई के बीच बैंकों से हुई निकासी के बाद का आंकड़ा यह है कि भारत के लोगों के पास 25.12 लाख करोड़ रुपए की नकदी पहुंच गई है। यानी नोटबंदी के समय के स्तर से लगभग डढ़े गुना ज्यादा नकदी लोगों के हाथ में है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में कैशलेस लेन-देन भी बढ़ा है लेकिन उससे ज्यादा तेजी से बढ़ रही है नकदी की अर्थव्यवस्था। कोरोना के संकट के बीच सरकारें और डिजिटल लेन-देन वाली कंपनियों ने काफी प्रचार भी किया है पर सका ज्यादा फायदा हुआ नहीं दिख रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shares