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चीन डराने की भाषा समझता है

कई सामरिक जानकारों का मानना है कि भारत दब कर या बैकफुट पर आकर चीन से बात कर रहा है। कांग्रेस को दबाव बना कर, आक्रामक होकर उससे बात करनी चाहिए। भारत अगर इसी तरह बातचीत करता रहा तो संभव है कि चीन थोड़ा पीछे हट जाए पर यथास्थिति बहाल नहीं होगी। यह चीन की रणनीति है। कहा जा रहा है कि वह भारत की सीमा के 40 वर्ग किलोमीटर इलाके को कब्जा करके बैठा है। अगर भारत दबाव बना कर और आक्रामक कूटनीति के सहारे आगे नहीं बढ़ेगी तो वह इतना इलाका खाली नहीं करेगी। थोड़ा पीछे हट कर बैठ जाएगा।

भारत के मशहूर सामरिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चैलानी का कहना है कि चीन अब भी अपने को सुपीरियर मान कर बात कर रहा है। तभी उसने अपने एक इलाके के सैन्य कमांडर को बातचीत के लिए भेजा, जबकि भारत की ओर से कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह बात करने गए थे। उसने भारत के तीन स्टार जनरल के मुकाबले अपना दो स्टार जनरल भेजा। भारत अगर उसकी ऐसी शर्तों को मानता गया तो मुश्किल होगी। तभी भारत को दबाव बनाना चाहिए। कई जानकार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मिसाल दे रहे हैं। पिछले दिनों चीन ने अमेरिकी जहाजों को अपने यहां आने की इजाजत नहीं दी थी। इसके जवाब में ट्रंप ने चीनी विमानों के अमेरिका में उतरने पर रोक लगाने की घोषणा की। उसके बाद चीन पीछे हटा और हर हफ्ते एक अमेरिकी विमान को अपने यहां आने की अनुमति दी। आर्थिक संधि के मसले पर भी ट्रंप ने इसी तरह चीन को झुकाया था। सो, भारत को भी अपनी सामरिक, आर्थिक और कूटनीतिक ताकत दिखानी चाहिए। इस समय चीन को घेरने के लिए कई मुद्दे हैं। कोरोना वायरस की वैश्विक जांच, हांगकांग और ताइवान का मुद्दा और आर्थिकी की मुद्दा सब ऐसे मुद्दे हैं, जिनके जरिए भारत चीन के ऊपर दबाव डाल सकता है। पर उसके लिए हिम्मत दिखानी होगी।

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