अब अपनी जमीनें छुड़ाने की बात करेगा भारत

भारत के नेता बहुत जोर देकर कह रहे हैं कि चीन के साथ बातचीत चल रही है और वार्ता के जरिए दोनों देश अपने विवादों को सुलझा लेंगे। बिल्कुल यहीं बयान नेपाल के संदर्भ में दिया जा रहा है कि वार्ता के जरिए दोनों देश अपने विवाद सुलझा लेंगे। अब तक नेपाल की अनदेखी कर रहे भारत ने वार्ता का प्रस्ताव भी दे दिया है। एक तरफ तो भारत के नेता वार्ता से विवाद सुलझाने की बात कर रहे हैं और दूसरी ओर यह भी कह रहा है कि सब कुछ ठीक है। सवाल है कि सब कुछ ठीक है तो वार्ता के जरिए क्या सुलझाना है? सरकार ईमानदारी से क्यों नहीं इस बात की मानती है कि दोनों देश भारत की जमीन पर दावा कर रहे हैं या कब्जा कर लिया है औऱ उसे छुड़ाने की बात करनी है?

असल में भारत की वार्ता कोई सीमा विवाद सुलझाने की नहीं है, बल्कि अपनी जमीन छुड़ाने की है। नेपाल ने नया नक्शा पास कर दिया है, जिसमें उसने लिपूलेख, कालापानी और लिम्प्याधुरा को अपने इलाके में दिखाया है। भारत को यह नक्शा बदलवना है और इसके लिए नेपाल से बात करनी है। उधर सरकार माने या न माने चीन भारत की सीमा में घुस आया है और भारत को उसके कब्जे से अपनी जमीन छुड़ानी है। सोचें, क्या पंचायत हो रही है। यह सही है कि भारत किसी की जमीन कब्जा नहीं करता या आक्रामकता नहीं दिखाता है पर उसे अपनी सीमा की रक्षा तो करनी चाहिए या कम से कम ऐसा प्रभाव बनाना चाहिए कि कोई देश उसकी सीमा की ओर आंख उठा कर नहीं देखे। यह भारत की कूटनीति की कमजोर है और बड़ी विफलता है, जो इस तरह की पंचायत की नौबत आई है।

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