भारत में कोरोना टेस्ट की गड़बड़ क्वालिटी - Naya India
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भारत में कोरोना टेस्ट की गड़बड़ क्वालिटी

भारत में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है और केंद्र व राज्य सरकारों की तमाम सदिच्छा के बावजूद न तो जांच की संख्या बढ़ पा रही है और न जांच की क्वालिटी बेहतर हो पा रही है। अब इंडियन कौंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च, आईसीएमआर को उम्मीद है कि 15 अप्रैल तक कुछ रैपिड टेस्टिंग किट भारत को मिल जाएंगे तो उसके बाद जांच में तेजी आएगी। ध्यान रहे भारत सरकार विदेशों से टेस्ट किट आने का एक हफ्ते से इंतजार कर रही है। पर इससे सही तरीके से जांच हो पाएगी, इसे लेकर संदेह है। इसका कारण यह है कि कोरोना वायरस की टेस्टिंग बहुत जटिल है और इसके लिए उपकरणों के साथ साथ बेहतरीन ट्रेनिंग की भी जरूरत होती है।

पिछले कुछ दिनों में कई जगह से गलत जांच की खबरें आई हैं, जिससे इलाज प्रभावित हुआ है। पुणे में महिला की शुरुआती जांच निगेटिव थी, जिसके बाद उसे जाने दिया गया था पर दो दिन बाद ही उसकी हालत खराब हो गई और तब जांच हुआ तो वह कोरोना पॉजिटिव निकली। ऐसा दिल्ली से सटे नोएडा में हुआ और कई दूसरे हिस्सों में भी हुआ है। तभी मरीजों या संदिग्धों की कई बार जांच करनी पड़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि कई कारणों से इसका सही सही पता लगा पाना मुश्किल हो रहा है। जैसे नैजल स्वैब से जांच होती है और अगर शुरू में वायरस की पर्याप्त मात्रा नहीं हुई तो जांच में उसका पता नहीं चल पाएगा। इसी तरह वायरस अगर फेफड़े तक चला गया तो तुरंत पता नहीं चल पाएगा। जब तक वह सांस की नली में रहता है तभी उसका पता लगाना आसान होता है। तभी माना जा रहा है कि असली संख्या पता लगाने के लिए जांच के अच्छे किट हों, अच्छे प्रशिक्षित लोग हों और धीरज के साथ जांच की जाए।

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