टेस्टिंग पहले क्यों नहीं बढ़ाई गई?

यह लाख टके का सवाल है कि केंद्र और राज्यों की सरकारों ने कोरोना वायरस की टेस्टिंग पहले क्यों नहीं बढ़ाई? पहले क्यों कम टेस्ट किए गए और अब क्यों अचानक टेस्टिंग बढ़ाने की बात हुई है? क्या इसके पीछे कोई रणनीति है? क्या जान बूझकर ऐसा किया गया? और उससे भी बड़ा सवाल है कि अगर पहले ज्यादा टेस्टिंग नहीं हुई है तो क्या उससे संक्रमित लोग ज्यादा लोगों में संक्रमण नहीं फैला चुके होंगे?

ये सवाल इसलिए हैं क्योंकि कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए पूरे देश में लागू लॉकडाउन का तीसरा हफ्ता शुरू होते ही अचानक केंद्र और राज्यों की सरकार में फुर्ती आ गई है। टेस्टिंग की संख्या बढ़ा दी गई है और आगे इसे ज्यादा बढ़ाना है। इसके अलावा रैपिड टेस्टिंग भी शुरू हो गई है, जिसके नतीजे जल्दी आ रहे हैं। यह हकीकत है कि 31 मार्च तक भारत में कुल 42 हजार 788 लोगों का टेस्ट किया गया था। सोचें, भारत में 31 जनवरी को पहला केस मिला था। पूरे फरवरी और पूरे मार्च यानी दो महीने में कुल 43 हजार से भी कम टेस्टिंग थी। लेकिन सात अप्रैल को यह आंकड़ा एक लाख 14 हजार से ज्यादा हो गया। यानी अगले सात दिन में 71 हजार लोगों का टेस्ट किया गया। यानी दस हजार से कुछ ज्यादा लोगों का टेस्ट हर दिन हुआ।

एक तथ्य यह भी जान लेना जरूरी है कि 31 मार्च को जब तक 43 हजार टेस्ट हुए थे, तब जांच में संक्रमित पाए जाने वाले लोगों का औसत 3.3 का था। लेकिन जब टेस्टिंग बढ़ी तो औसत में एक फीसदी की बढ़ोतरी हो गई। सात अप्रैल को जब एक लाख 14 हजार टेस्ट हुए तो संक्रमण का औसत बढ़ कर 4.2 हो गया। जाहिर है कि टेस्टिंग और ज्यादा होगी तो संक्रमितों की सख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है।

तभी यह अंदेशा जाहिर किया जा रह है कि जान बूझकर टेस्टिंग कम रखी गई। लॉकडाउन का असर दिखना शुरू होने का इंतजार किया गया। सरकार और विशेषज्ञों को पता था कि दो हफ्ते तक कंपलीट लॉकडाउन के बाद अपने आप संक्रमितों की संख्या में कमी आएगी। संक्रमण फैलना काफी हद तक कम हो गया रहेगा। जैसा कि खुद आईसीएमआर ने कहा कि लॉकडाउन में जहां एक संक्रमित व्यक्ति सिर्फ ढाई लोगों को संक्रमित कर पात है वहीं सामान्य दिनों में एक संक्रमित 406 लोगों में संक्रमण फैला सकता है। इसी वजह से लॉकडाउन का तीसरा हफ्ता शुरू होने के बाद टेस्टिंग में तेजी लाई गई। अपने कम संसाधन होने की वजह से उस पर लोड न बढ़े, उस लिहाज से यह एक अच्छी रणनीति हो सकती है। पर इसका उलटा असर भी हो सकता था।

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One thought on “टेस्टिंग पहले क्यों नहीं बढ़ाई गई?

  1. अपने कम संसाधन होने की वजह से उस पर लोड न बढ़े, उस लिहाज से यह एक अच्छी रणनीति हो सकती है। पर इसका उलटा असर भी हो सकता था। So you want to have both the world to comment in future… Not a good journalistic behaviour.

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