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ईरान की चिंता करे भारत

पश्चिम एशिया के देशों में ईरान भारत का पुराना दोस्त देश रहा है। उसने तेल खरीद में भारत को कई किस्म की रियायतें दी हुई थीं पर अमेरिका की ओर से लगाई गई पाबंदियों की वजह से भारत ने डर कर पांव पीछे खींच लिए। तभी यह खबर आई कि ईरान ने चाबहार रेल परियोजना से भारत को बाहर कर दिया। बाद में इस पर सफाई दी गई कि भारत कभी रेल परियोजना का पार्ट नहीं था इसलिए बाहर होने का सवाल ही पैदा नहीं होता है। इसकी हकीकत कुछ भी हो पर यह हकीकत है कि ईरान खुश नहीं है वह भारत की बजाय चीन के साथ दोस्ती बढ़ा रहा है।

तभी इस्लामाबाद में ईरान के राजदूत ने गोल्डेन रिंग की बात की है। उन्होंने कहा कि गोल्डेन रिंग की परिकल्पना में रूस, चीन, ईरान, पाकिस्तान और तुर्की शामिल हैं। यह परियोजना चीन को रणनीतिक रूप से अहम दो बंदरगाहों- ग्वादर और चाबहार तक सीधी एक्सेस देगी। यह भारत के लिए अच्छी बात नहीं है। चीन और पाकिस्तान पहले से भारत के दो विरोधी देश हैं और ईरान भी अगर उनके साथ मिल कर तुर्की को उनकी किसी परियोजना से जोड़ रहा है तो यह भारत के लिए चिंता की बात होनी चाहिए। रूस भारत का मित्र है पर उससे पहले वह चीन का दोस्त है। यह सिर्फ रेल परियोजना का मामला नहीं है, बल्कि इसके कई दूसरे आयाम हैं, जिन पर विचार किया जाना चाहिए।

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