हवाई चप्पल वाला ट्रेन में कैसे चलेगा?

प्रधानमंत्री को तुक मिलाने का बहुत शौक है। इसी शौक के तहत उन्होंने यह जुमला गढ़ा था कि अब हवाई चप्पल वाला भी हवाई जहाज से चलेगा। हालांकि वह तो पहले से ही लो कॉस्ट एयरलाइंस के शुरू होने के बाद दिखने लगा था। पिछले 10-12 साल में यह स्थिति बदली थी और हवाईअड्डे से लेकर विमानों तक में यह साफ दिखता था। लेकिन प्रधानमंत्री को यह जुमला अच्छा लगा तो वे बोलते रहे। पर अब उनकी सरकार की नीतियों से ऐसा लग रहा है कि हवाई चप्पल वालों का ट्रेन में चलना भी मुश्किल हो जाएगा। रेलवे के निजीकरण के प्रयासों से यह पहले से अंदाजा लगाया जा रहा था पर अब भारतीय रेलवे ऐसे फैसले कर रही है, जिनसे आम लोगों के लिए ट्रेन की सेवा दूर होती जा रही है।

जैसे भारतीय रेलवे ने तय किया है कि हाई स्पीड ट्रेनों में सिर्फ एसी कोच होंगे। इन ट्रेनों में स्पीकर कोच नहीं लगाए जाएंगे। यानी अब सारी हाई स्पीड ट्रेनें राजधानी एक्सप्रेस की तरह हो जाएंगी। लंबी दूरी की लगभग सारी ट्रेनों में से स्लीपर क्लास हटा दिए जाएंगे। एक तो हाई स्पीड ट्रेन और ऊपर से सारे एसी कोचेज, अब सहज ही इनके किराए का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह हकीकत है कि हवाई चप्पल वालों के लिए हवाई जहाज की टिकट आसान है, राजधानी की टिकट मुश्किल है। ऐसे ही अब हाई स्पीड ट्रेनें उनकी पहुंच से बाहर हो जाएगी। 110 किलोमीटर प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों में ही स्लीपर क्लास होंगे। इतना ही नहीं भारतीय रेलवे ट्रेन में यात्रा करने वालों पर प्रति टिकट यूजर्स चार्ज लगाने जा रही है, प्लेटफॉर्म टिकट के साथ विजिटर्स चार्ज जोड़ा जाएगा और निजी प्लेटफॉर्म्स पर व निजी ट्रेनों में जो अतिरिक्त पैसे लगेंगे वह अलग है।

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