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बंद हो गई पांच ट्रिलियन डॉलर की बात

बड़े दिन से यह सुनने को नहीं मिला कि अब भारत कब तक पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा? पुरानी डेडलाइन 2024 की थी। कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू होने से ठीक पहले अर्थव्यवस्था की बुरी दशा से ध्यान भटकाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का शिगूफा छोड़ा था। उनके कहने भर की देर थी, भाजपा के हर नेता, केंद्र सरकार के हर मंत्री, हिंदुवादी राजनीति से जुड़े हर शख्स और यहां तक कि सरकारी अधिकारियों की जुबान पर यह जुमला चढ़ गया। सब पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात करने लगे। फिल्म और सामाजिक क्षेत्र की जो शख्सियतें नरेंद्र मोदी को कल्ट मानती हैं उन्होंने तो इसके लिए प्रधानमंत्री को बधाई देनी भी शुरू कर दी। लेकिन अब चारों तरफ सन्नाटा है।

एक आकलन के मुताबिक भारत अगर लगातार आठ फीसदी की दर से विकास करे तो 2026 के बाद ही पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है। इसमें भी बहुत अगर मगर हैं। एक आकलन यह भी है कि 2022 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 2020 के मुकाबले छोटा हो जाएगा। यानी एक साल के बाद हम दो साल पीछे होंगे। एक आकलन यह भी कि भारत जिस समय पांच खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा उस समय भी चीन भारत के मुकाबले चार गुना बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश होगा। तभी ऐसा लग रहा है कि भारत ने चीन के साथ तुलना भी बंद कर दी है। अब भारत की तुलना या तो पाकिस्तान के साथ हो रही है या बांग्लादेश के साथ। बांग्लादेश भी जल्दी ही हर पैमाने पर भारत से आगे निकलने वाला है।

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