Infosys is anti national अब तक भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ
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अब इंफोसिस भी देश विरोधी है!

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अब तक भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद आदि के पदाधिकारी, कार्यकर्ता जेएनयू और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों को, सामाजिक व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को, दलित व आदिवासी कार्यकर्ताओं को, विपक्षी पार्टियों के नेताओं को ही देश विरोधी और टुकड़े टुकड़े गैंग का सदस्य कहा करते थे लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि दुनिया भर में सबसे सम्मानित भारतीय कंपनियों में से एक इंफोसिस को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ ने देश विरोधी कहा है। इतना ही नहीं आरएसएस ने अपने मुखपत्र पांचजन्य की कवर स्टोरी में इंफोसिस को देश विरोधियों, नक्सलियों, वामपंथियों और टुकड़े टुकड़े गैंग की मदद करने वाली कंपनी करार दिया है।

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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के मुखपत्र में कहा गया है कि भारत सरकार की कर वसूली को प्रभावित करने के मकसद से साजिश के तहत इंफोसिस ने सरकारी वेबसाइट को खराब तरीके से डिजाइन किया। गौरतलब है कि सरकार ने जीएसटी, कंपनी मामलों के मंत्रालय, सीबीडीटी आदि की वेबसाइट डिजाइन करने का ठेका इंफोसिस को दिया था। कंपनी ने साइट बनाई, जिसे सात जून को लांच किया गया। तभी से इस वेबसाइट में कुछ न कुछ खामी आ रही है। अब सरकार ने उसे सब कुछ ठीक करने के लिए 15 सितंबर तक का समय दिया है।

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इसी को लेकर आरएसएस ने इंफोसिस पर साजिश रचने का आरोप लगाया है। आरएसएस ने पूछा है कि क्या कंपनी इसी तरह विदेशी क्लायंट की सेवा करती है? ‘साख और आघात’ नाम से लिखे कवर स्टोरी में कंपनी पर हमला किया गया है, कंपनी के संस्थापकों में से एक नंदन नीलेकणी को कांग्रेस का आदमी बताया है और कंपनी के संस्थापक नारायणमूर्ति को भाजपा का वैचारिक विरोधी कहा गया है। इसमें कंपनी के ऊपर देश विरोधियों को समर्थन देने के आरोपों का भी जिक्र है। देश की सबसे सम्मानित कंपनियों में से एक इंफोसिस के खिलाफ इस बड़े हमले को लेकर समूचे कारपोरेट जगत में खामोशी है। विपक्षी पार्टियों ने जरूर कंपनी का बचाव किया है। इस बीच दूसरी ओर यह सवाल भी पूछा जा रहा है कि सरकार ने अच्छी खासी चलती हुई सरकारी वेबसाइट को क्यों रिडिजाइन कराया और कराया तो सरकारी कंपनी एनआईसी की बजाय निजी कंपनी को क्यों शामिल किया?

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