दिखावे के लिए वीवो को हटाना!

चीन की मोबाइल बनाने वाली कंपनी वीवो अब इंडियन प्रीमियर लीग यानी क्रिकेट के आईपीएल तमाशे में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड, बीसीसीआई का मुख्य प्रायोजक नहीं रहेगी। हालांकि इसे लेकर कई किस्म की खबरें आई हैं। पहले खबर आई कि आईपीएल की गवर्निंग कौंसिल ने वीवो को मुख्य प्रायोजक रखने का फैसला किया है। यह खबर आने के बाद एकदम से तीखी प्रतिक्रिया हुई। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने इसका विरोध किया। सोशल मीडिया में भी कहा जाने लगा कि लोगों से छोटी छोटी चीजों का बहिष्कार कराया जा रहा है और बीसीसीआई को चीनी कंपनियों को प्रायोजक रखने की छूट दी जा रही है। यह भी कहा गया कि केंद्रीय गृह मंत्री के बेटे बीसीसीआई के सचिव हैं और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री के भाई बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष हैं इसलिए यह संभव हो रहा है। भाजपा और हिंदुत्व की राजनीति के समर्थकों ने भी कहा कि चीन की कंपनियों के हाथ भारतीय जवानों के खून से रंगे हुए हैं।

इस तीखे विरोध के बाद वीवो के प्रायोजक से हटने की बात आई। उसमें भी पहले कहा गया कि भारत में चीन विरोधी माहौल को देखते हुए बीसीसीआई ने उसे हटा दिया। लेकिन बाद में खबर आई कि उसने खुद ही एक साल के लिए हटने का फैसला किया और फिर अगले साल से तीन साल के लिए करार होगा। इसका मतलब है कि अभी चीन विरोधी माहौल को देखते हुए लोगों के गुस्से को ठंडा करने के मकसद से यह एक दिखावा हो रहा है। हालांकि चीन की मोबाइल कंपनियां आईपीएल के प्रसारण में प्रायोजक बनी रहेंगी। आखिर इसका प्रसारण करने वाले चैनल ने भी तो हजारों करोड़ रुपए में प्रसारण के अधिकार खरीदे हैं।
बहरहाल, यह दिखावा इसलिए है क्योंकि चीन की हिस्सेदारी वाली बाकी कंपनियों के प्रायोजक रहने पर कोई सवाल नहीं उठाया जा रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम के अनेक खिलाड़ियों और टीमों को प्रायोजित करने वाली कंपनियों में चीन का पैसा लगा है। सबसे बड़ी मिसाल बायजू और पेटीएम हैं। पेटीएम में चीन की सबसे बडी ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा का पैसा लगा हुआ है और बायजू रविंद्रन की ई-लर्निंग कंपनी बायजू में चीन की कंपनी टेनसेंट का पैसा लगा हुआ है। पर ये दोनों कपंनियां खिलाड़ियों और टीमों की प्रायोजक बनी रहेंगी और टेलीविजन पर मैचों के प्रसारण के दौरान इनके विज्ञापन चलते रहेंगे। और भारत के लोग इसी बात से खुश रहेंगे कि चीन से राखी नहीं मंगा कर चीन को चार हजार करोड़ रुपए का झटका दिया गया है।

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