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Thursday, May 13, 2021
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क्या बैकफुट पर हैं नरेंद्र मोदी?

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कोरोना वायरस की महामारी के बेकाबू होने और उसके बाद पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने की वजह से क्या नरेंद्र मोदी बैकफुट पर हैं? यह सही है कि वे भाजपा के सबसे बड़े नेता हैं और भाजपा के पास उनका कोई विकल्प नहीं है। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के पास भी उनके अलावा कोई विकल्प नहीं है। उनकी ऑथोरिटी को चुनौती देने वाला इस समय पार्टी, सरकार या संघ में कोई नहीं है। इसके बावजूद ऐसा लग रहा है कि वे बैकफुट पर हैं। पहली बार ऐसा हुआ है कि वे धारणा का प्रबंधन नहीं कर पा रहे हैं और लोकप्रिय विमर्श उनके खिलाफ बन रहा है और इस वजह से वे परेशान हैं और फैसले नहीं कर पा रहे हैं।

प्रधानमंत्री का अपने मंत्रीपरिषद की बैठक बुलाना इस परेशानी का संकेत है। इस बैठक में कोई फैसला नहीं कर पाना भी इसी परेशानी को दिखाता है। प्रधानमंत्री ने लंबे समय के बाद मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई थी। आमतौर पर कैबिनेट की बैठकें ही होती हैं और उसमें भी काम सिर्फ फैसलों पर मुहर लगाने का होता है। सो, जब उन्होंने मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई तो ऐसा लगा कि कोई बड़ा फैसला होने वाला है। लेकिन इसमें कोई फैसला नहीं हुआ। प्रधानमंत्री ने इस बैठक में प्रवचन देने के अंदाज में अपने मंत्रियों से कहा कि वे अपने क्षेत्र में जाएं, लोगों के संपर्क में रहें, उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करें आदि आदि।

सबसे हैरानी की बात यह रही कि मंत्रियों को नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पॉल की तरफ से एक प्रेजेंटेशन दिखाई गई, जिसमें बताया गया कि सरकार कोरोना से लड़ने के लिए क्या क्या कर रही है। सोचें, क्या प्रधानमंत्री को अपने मंत्रियों के सामने यह सफाई देने की जरूरत है कि सरकार क्या कर रही है? वे तो अपनी तरफ से ही ऐसी ऐसी बातों का प्रचार करते रहे हैं, जो सरकार नहीं भी कर रही होती है। उसके बाद पश्चिम बंगाल के नतीजे आ गए, जिनसे नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों की सीमाएं जाहिर हो गईं। यह हिंदी इलाके से बाहर पैर फैलाने की भाजपा की योजना पर स्थायी ब्रेक साबित हो सकता है।

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साभार - ऐसे भी जाने सत्य

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