distribute tickets for SP सपा के लिए टिकट बांटना आसान नहीं
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सपा के लिए टिकट बांटना आसान नहीं

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समाजवादी पार्टी के एक नेता ने कहा कि अगर अखिलेश यादव पार्टी का दरवाजा खोल दें तो भाजपा के दो सौ विधायक सपा में शामिल हो जाएंगे। लेकिन सवाल है कि इन नेताओं को सपा  प्रमुख अखिलेश यादव टिकट कैसे देंगे? सपा का संगठन काफी हद तक एक ऑर्गेनिक संगठन है, बिल्कुल वैसे ही जैसे संघ और पुरानी भाजपा का रहा है। वहां मुलायम सिंह और शिवपाल यादव के जमाने से राजनीति करने वाले नेता भरे पड़े हैं। वहां दलबदल करने वाले कम नेता हैं। यहीं सपा की ताकत रही है। ऐसे में बाहर से आने वाले नेताओं को लिए सीट एडजस्ट करना सपा के लिए आसान नहीं होगा। हालांकि सपा के लिए अच्छी बात यह है कि पिछली बार उसके सिर्फ 47 विधायक जीते थे। इसलिए उसे विधायकों की ज्यादा टिकट नहीं काटनी है, बल्कि पूर्व प्रत्याशियों की टिकट काटनी है। distribute tickets for SP

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सपा ने सहयोगी पार्टियों के साथ सीटों का तालमेल कर लिया है। रालोद को 30 और राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को आठ सीट दिए जाने की खबर है। इसके अलावा महान दल, अपना दल के कृष्णा पटेल धड़ेस एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस के लिए भी सीटे छोड़ी गई हैं। फिर भी सपा के पास साढ़े तीन सौ के करीब सीटें हैं। इसके बावजूद बाहर से आए नेताओं को एडजस्ट करने में मुश्किल है। खबर है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अपने बेटे के लिए ऊंचाहार सीट चाहते हैं। इस सीट से समाजवादी पार्टी के मनोज पांडेय विधायक हैं। इसी तरह दारा सिंह चौहान पिछली बार मऊ की मधुबन सीट से जीते थे लेकिन इस बार कहा जा रहा है कि वे घोसी सीट से लड़ना चाहते हैं। बताया जा रहा है कि उनकी वजह से मुख्तार अंसारी के परिवार के असर वाले इस इलाके में सपा को अपना सामाजिक समीकरण ठीक करना होगा। ऐसे ही स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी संघमित्रा मौर्य बदायूं सीट से सांसद हैं, जहां से मुलायम सिंह के भतीजे धर्मेंद्र यादव सांसद होते थे। सो, सपा को धर्मेंद्र यादव या संघमित्रा मौर्य के लिए नई व्यवस्था करनी होगी।

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