जगन मोहन की चिट्ठी का क्या हुआ? - Naya India
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जगन मोहन की चिट्ठी का क्या हुआ?

यह हैरान करने वाली बात है कि एक राज्य के मुख्यमंत्री ने देश के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखी और सुप्रीम कोर्ट के दूसरे सबसे वरिष्ठ जज की शिकायत की और उसके 15 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई होती नहीं दिख  रही है। कम से कम सार्वजनिक रूप से कुछ पता नहीं चल रहा है कि उस मामले में क्या हो रहा है। मुख्यमंत्री ने बेहद गंभीर आरोप लगाया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता में जो दूसरे नंबर पर जज हैं वे आंध्र प्रदेश की सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने अपनी चिट्ठी में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चार जजों की भी शिकायत की थी। उन्होंने सबके नाम लिखे थे और उनके फैसलों की भी जानकारी दी थी। उन्होंने इन जजों के खिलाफ लगाए गए अपने आरोपों के पक्ष में कुछ तथ्य भी पेश किए थे।

कायदे से मुख्यमंत्री की लिखी चिट्ठी पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। कम से कम जांच शुरू होनी चाहिए थी और यह पता लगाने का गंभीर प्रयास होना चाहिए था कि जगन मोहन के लगाए आरोपों में कोई सचाई है या अदालत के फैसलों से परेशान होकर उन्होंने झूठे आरोप लगाए हैं। अगर उनको आरोपों में दम नहीं है तो अब तक उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू हो जानी चाहिए था। ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट ने अपनी अवमानना के लिए बहुत ऊंचा पैमाना बनाया है। अदालत ने एक ट्विट के आधार पर प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना का मामला शुरू किया था और यहां आठ पन्नों की चिट्ठी है, जिसमें दस तरह के आरोप हैं और कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

इस तरह की एक और चिट्ठी एक पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखी थी और उनके आत्महत्या करने के बाद वह चिट्ठी सामने आई थी। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल ने सुसाइड कर  लिया था और तब उनकी चिट्ठी सामने आई थी। कोई 60 पन्नों की इस चिट्ठी में उन्होंने न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका में शीर्ष पर बैठे लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। जो अदालत मरने वालों की बात को अकाट्य सत्य मानती है उसने मृत्यु पूर्व एक बयान के तौर पर लिखी गई पूर्व मुख्यमंत्री की चिट्ठी पर लीपापोती हो जाने दी। जगन मोहन रेड्डी की लिखी चिट्ठी भी लगता है उसी गति को प्राप्त होने वाली है।

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