जम्मू कश्मीर में कब और कैसे चुनाव होगा?

जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने कहा है कि राज्य में जल्दी ही चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने यह नहीं कहा है कि चुनाव होंगे। चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी। सवाल है इस प्रक्रिया में क्या क्या शामिल होगा? क्या सरकार चुनाव आयोग को कोई समय सीमा देगी और मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम होगा? आमतौर पर तैयारी का पहला चरण मतदाता सूची का पुनरीक्षण ही होता है। अगर यह कराया जाता है तो इसका मतलब है कि मतदान जल्दी होगा। पर जम्मू कश्मीर के मामले में तत्काल ऐसा होने के आसार नहीं है। ऐसा परिसीमन नहीं होने और सुरक्षा कारणों से होगा। ऊपर से जेल में बंद विपक्षी नेताओं ने इस आइडिया को खारिज कर दिया है।

बहरहाल, चुनाव प्रक्रिया शुरू होने से उप राज्यपाल का मतलब परिसीमन की प्रक्रिया और जेल में बंद नेताओं की रिहाई से हो सकता है। ध्यान रहे जम्मू कश्मीर में परिसीमन नहीं हुआ है। अगस्त में केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया, जिसमें जम्मू कश्मीर में दिल्ली की तरह विधानसभा रखी गई और लद्दाख को अलग तरह का केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। लद्दाख में विधानसभा की चार सीटें आती हैं।

उन्हें हटा दें तो जम्मू कश्मीर में 83 सीटें बचेंगी। माना जा रहा है कि परिसीमन के जरिए इन सीटों की संरचना बदली जाएगी। अभी के हिसाब से अगर चुनाव हुआ तो भाजपा कश्मीर घाटी में एक भी सीट नहीं जीत पाएगी और सिर्फ जम्मू इलाके की जीत से वह राज्य में सरकार नहीं बना पाएगी। दूसरे राज्य में अभी सुरक्षा हालात की वास्तविक परीक्षा नहीं हुई है। ज्यादातर बड़ी पार्टियों के नेता जेल में हैं और चारों तक सुरक्षा के भारी बंदोबस्त हैं। असली परीक्षा तब होगी, जब नेता जेल से छूटेंगे और पाबंदियां हटेंगी। सो, यह नहीं कहा जा सकता है कि जल्दी चुनाव हो जाएंगे। प्रक्रिया भले अभी शुरू हो जाए पर चुनाव में समय लगेगा।

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