कश्मीर में सरकार आखिर करना क्या चाहती है?

जम्मू कश्मीर में केंद्र सरकार आखिरकार क्या करना चाहती है? उसने एक साल से कम समय के अंतराल में तीन राज्यपाल बदले हैं। आखिर सरकार राज्यपालों, उप राज्यपालों से क्या हासिल करना चाहती है? एक साल पहले पांच अगस्त को सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले कानून को मंजूरी दी थी। उस समय राज्य में सत्यपाल मलिक राज्यपाल थे। विशेष दर्जा खत्म होने और राज्य का बंटवारा होने के बाद उनका स्टैट्स बदल गया। वे जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल हो गए। बतौर उप राज्यपाल उन्होंने करीब तीन महीने तक काम किया। वे एक बेहतरीन उप राज्यपाल साबित हो सकते थे क्योंकि उन्होंने जीवन भर दिल्ली में रह कर राजनीति की और उनके पास एक राष्ट्रीय विजन है। उन्होंने सभी पार्टियों के नेताओं के साथ काम किया है।

पर अचानक पिछले साल अक्टूबर में उनको हटा कर आईएएस अधिकारी गिरीश चंद्र मुर्मू को उप राज्यपाल बनाया गया। जिस समय मलिक को हटाया गया उस समय उन्हें या किसी और कतई अंदाजा नहीं था कि वे हटाए जा सकते हैं। उसी तरह दस महीने काम करने के बाद अचानक एक दिन मुर्मू को भी हटा दिया गया। अब मुर्मू की जगह मनोज सिन्हा को उप राज्यपाल बनाया गया है। मनोज सिन्हा की अब तक की राजनीति बनारस और उसके आसपास तक ही सीमित रही है। वे कई बार सांसद रहे और केंद्र में मंत्री भी रहे तब भी दिल्ली में वे बनारस के ही नेता माने गए। यह उनके कामकाज और गुणदोष पर विवेचना नहीं है पर ऐसा लगता नहीं है कि वे उनके उप राज्यपाल बनने से राज्य में कोई गुणात्मक बदलाव आएगा।

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