अब जदयू को राहत

झारखंड में जनता दल यू को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते हैं कि जदयू को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिले। इसके लिए उन्होंने झारखंड की सभी सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए। उनका कोई भी उम्मीदवार नहीं जीता पर इससे भी बुरा यह हुआ कि उनकी पार्टी को इतने वोट भी नहीं मिले, जिससे जदयू को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाने में कोई भी मदद मिल पाए। हालांकि इसके बावजूद वे इस योजना के तहत दिल्ली में भी सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे।

बहरहाल, झारखंड में इतने खराब प्रदर्शन के बावजूद जनता दल यू के नेता खुश हैं क्योंकि भाजपा हारी है और वह भी अपनी सहयोगी पार्टी आजसू की वजह से। ऐन चुनाव से पहले भाजपा और आजसू का तालमेल खत्म हुआ था। इससे पहले दोनों पार्टियां हमेशा मिल कर लड़ती रही हैं। आजसू ने अलग होकर एक दर्जन से ज्यादा सीटों पर भाजपा को नुकसान पहुंचाया। नतीजों के बाद सारे भाजपा नेता कह रहे हैं कि अगर आजसू साथ होती तो प्रदेश की तस्वीर अलग होती।

यहीं बात महाराष्ट्र में शिव सेना को लेकर कही जा रही है। दो चुनावों से शिव सेना के साथ भाजपा का तालमेल बिगड़ा है। हालांकि पहली बार तो जैसे तैसे दोनों पार्टियां साथ आ गई थीं पर दूसरी बार शिव सेना ने भाजपा को छोड़ कर एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार बना ली। सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद भाजपा सत्ता से बाहर है। बिहार में जदयू को छोड़ कर भाजपा अपनी राजनीति आजमा चुकी है। बिना जदयू के लड़ने पर भाजपा को सिर्फ 54 सीटें मिली थीं। तभी भाजपा ने फिर से जदयू को साथ लिया और लोकसभा चुनाव में बराबर सीटें दीं। नीतीश कुमार विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटों पर लड़ना चाहते हैं। महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के अनुभव के बाद अब कहा जा रहा है कि भाजपा उनको ज्यादा सीटें देने पर आसानी से तैयार हो जाएगी।

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