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झारखंड में क्या चाहती है भाजपा?

Mamtas kindness to Hemant

किसी को समझ में नहीं आ रहा है कि झारखंड में भारतीय जनता पार्टी आखिर क्या चाहती है। सबसे ज्यादा पार्टी के प्रदेश नेता ही परेशान हैं क्योंकि उनको समझ में नहीं आ रहा है कि आलाकमान की क्या मंशा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की बेचैनी अपनी जगह है क्योंकि उनकी कुर्सी पर खतरा मंडरा रहा है। उनकी विधानसभा सदस्यता दांव पर लगी है। लाभ के पद के मामले में चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को भेज दी है, जिसे राज्यपाल रमेश बैस पिछले डेढ़ महीने से ज्यादा समय से लेकर बैठे हैं। मुख्यमंत्री के भाई और पार्टी के विधायक बसंत सोरेन की सदस्यता को लेकर भी चुनाव आयोग की सिफारिश डेढ़ महीने से राज्यपाल के पास लंबित है।

संवैधानिक प्रावधानों के लूप होल का इस्तेमाल करके राज्यपाल रिपोर्ट दबाए बैठे हैं। उनकी कोई बाध्यता नहीं है कि वे कितने समय में चुनाव आयोग की रिपोर्ट पर फैसला करेंगे। इस बीच केंद्रीय एजेंसियां एक एक करके सरकारी और राजनीतिक व्यक्तियों को गिरफ्तार कर रही है। राज्य सरकार की वरिष्ठ अधिकारी पूजा सिंघल को ईडी ने गिरफ्तार किया है। मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को भी ईडी ने गिरफ्तार किया है। राज्य सरकार के करीबी माने जाने वाले कारोबारियों प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव और अमित अग्रवाल को भी ईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार अभिषेक श्रीवास्तव से कई बार ईडी की पूछताछ हो चुकी है और उनके ऊपर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

राज्य में जब भी कोई नई गिरफ्तारी होती है तो मुख्यमंत्री बनने की आस लगाए बैठे पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की बांछें खिल जाती हैं। वे ट्विट करने लगते हैं। उनके करीबी भाजपा सांसद निशिकांत दुबे तो पिछले पांच-छह महीने में कई बार मुख्यमंत्री और सरकार की श्रद्धांजलि लिख चुके हैं। अब वे भी थक हार कर बैठ गए हैं। प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने भी बड़ी भागदौड़ की। ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस पार्टी प्रदेश में कभी भी टूट सकती है और 12 से 15 विधायक भाजपा के साथ चले जाएंगे। लेकिन अब सारी अटकलें थम गई हैं।

कथित तौर पर भाजपा से पैसे लेने के आरोपी तीन विधायक जमानत पर छूट तो गए हैं लेकिन शर्तों के मुताबिक वे अभी कोलकाता से बाहर नहीं जा सकते हैं। जो लोग कांग्रेस विधायकों को तोड़ने का दावा कर रहे थे वे भी हैरान परेशान हैं कि इन तीन विधायकों को राहत क्यों नहीं मिल पा रही है। भाजपा के एक जानकार नेता का कहना है कि पहले तो इरादा था कि कांग्रेस के विधायक टूटते हैं तो सरकार गिरा दी जाए लेकिन अब तुरंत भाजपा ऐसा इसलिए नहीं चाहती है क्योंकि मुख्यमंत्री ने 1932 का खतियान लागू करने से लेकर पुरानी पेंशन योजना सहित कई ऐसी योजनाओं की घोषणा कर दी है, जिसे लागू करना मुश्किल है। सो, भाजपा अभी सरकार गिराने की बजाय इंतजार करेगी और सरकार वादों को पूरा नहीं कर पाएगी तो उसे एक्सपोज करेगी।

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