झारखंड में नया समीकरण बनेगा

झारखंड में चुनाव के बाद नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है और वह भी भाजपा की सहयोगी पार्टियों की वजह से ही संभव होने के आसार दिख रहे हैं। भाजपा की सहयोगी पार्टियों ने राज्य में भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला है। बिहार में भाजपा की सहयोगी जनता दल यू राज्य की ज्यादातर सीटों पर चुनाव लड़ रही है। दूसरी सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी भी 50 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

झारखंड में दो दशक तक भाजपा की सहयोगी रही ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन, आजसू ने भी ज्यादातर सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। भाजपा से अलग होकर अपनी पार्टी बनाने वाले बाबूलाल मरांडी अलग सारी सीटों पर लड़ रहे हैं।

भाजपा के अपने नेता और उसकी सहयोगी पार्टियां इतनी सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं तो आखिर वे किसके वोट का नुकसान करेंगी? आजसू, जदयू, लोजपा और जेवीएम को जो भी वोट मिलेगा वह भाजपा या एनडीए के ही वोट का हिस्सा होगा। इस बिखराव से विपक्षी पार्टियों के लिए अवसर बनेगा। असल में भाजपा के बागी नेताओं और उसके नाराज सहयोगियों की मंशा महाराष्ट्र या हरियाणा जैसा नतीजा सुनिश्चित करने का की है।

वे चाहते हैं कि विधानसभा त्रिशंकु हो जाए, फिर वे नए समीकरण के लिए काम करेंगे। जनता दल यू ने मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ पूर्वी जमशेदपुर सीट पर चुनाव लड़ रहे सरयू राय का समर्थन करके नए समीकरण का संकेत दिया है। हालांकि सरयू राय का जीतना मुश्किल है पर चुनाव बाद भाजपा के सहयोगी दलों की राजनीति की वे एक धुरी बन सकते हैं। विपक्षी पार्टियों की नजर भी इस नए समीकरण पर है। नतीजों के बाद वे अपनी जरूरत के हिसाब से इसका इस्तेमाल करेंगे।

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