कमलनाथ का क्या करेगी कांग्रेस?

कांग्रेस पार्टी में इस बात को लेकर उधेड़बुन है कि कमलनाथ का क्या किया जाए? वे 15 साल के बाद कांग्रेस को सत्ता मिली तो मुख्यमंत्री बने थे और 15 महीने में उनके देखते-देखते सरकार चली गई। फिर भी कांग्रेस पार्टी ने मध्य प्रदेश की पूरी कमान उनके हाथ में रहने दी। वे विधायक दल के नेता भी रहे और प्रदेश अध्यक्ष भी। उनकी दोहरी जिम्मेदारी के बीच राज्य में 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए। ये सब कांग्रेस की जीती हुई सीटें थीं पर कांग्रेस इनमें से सिर्फ नौ सीटें जीत पाई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कमान में भाजपा ने 19 सीटें जीत कर सरकार के लिए स्थायी बहुमत हासिल कर लिया है। सो, अब कमलनाथ के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस में गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

हालांकि कमलनाथ अकेले नेता नहीं हैं, जिन्होंने भाजपा के हाथों मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवाई और उपचुनाव में भी हारे। कर्नाटक में भी पिछले साल ऐसा ही हुआ था। कांग्रेस के समर्थन से एचडी कुमारस्वामी वहां मुख्यमंत्री बने थे। वहां भी कांग्रेस के दिग्गज नेता सिद्धरमैया, डीके शिवकुमार, मल्लिकार्जुन खड़गे आदि कांग्रेस विधायकों को नहीं संभाल पाए। कांग्रेस और जेडीएस दोनों के विधायक टूटे और भाजपा ने सरकार बना ली। बाद में उपचुनाव में भाजपा ने ज्यादातर सीटें भी जीत लीं। वहां भी पार्टी ने किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इसलिए ऐसा लग रहा है कि मध्य प्रदेश में भी थोड़े समय तो यथास्थिति रहेगी, लेकिन जल्दी ही पार्टी को फैसला करना होगा। किसी नए और तेजतर्रार नेता को प्रदेश अध्यक्ष बना करके पार्टी की कमान उसे देनी चाहिए ताकि 2023 के चुनाव की तैयारियां हो सकें।

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