भाजपा के क्षत्रपों की वापसी की शुरुआत!

कर्नाटक में हुए उपचुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बड़े संदेश है। यह भाजपा के पुराने क्षत्रपों की वापसी का संकेत है। पार्टी के आलामान यानी मौजूदा नेतृत्व के लिए भी इस नतीजे में बड़े संदेश छिपे हैं। ध्यान रहे राज्य में 15 सीटों के लिए हुए उपचुनाव में भाजपा ने 12 पर जीत दर्ज की है।

प्रदेश के सबसे बड़े क्षत्रप एचडी देवगौड़ा की पार्टी को भाजपा ने उस इलाके में हराया है, जिसे उनका गढ़ माना जाता है। राज्य में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार गिरा कर भाजपा की सरकार बनवाने से लेकर उपचुनाव में भाजपा की जीत तक पूरा ऑपरेशन अकेले बीएस येदियुरप्पा ने किया।

जानकार सूत्रों का कहना है कि भाजपा के आला नेता इस पक्ष में नहीं थे। वे नहीं चाहते थे कि गठबंधन की सरकार गिरा कर भाजपा की सरकार बने। बताया जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व राज्य में मध्यावधि चुनाव के मूड में था। उनका मानना था कि अगर कांग्रेस और जेडीएस के आपसी झगड़े से सरकार गिर जाती है तो राज्य में मध्यावधि चुनाव हो और अगर भाजपा को पूर्ण बहुमत मिल जाए तो येदियुरप्पा की जगह किसी नए नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाए। पर येदियुरप्पा ने इस सारे गेम प्लान पर पानी फेर दिया।

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उन्होंने सफलतापूर्वक ऑपरेशन लोट्स चलाया। उन्होंने कांग्रेस और जेडीएस के जरूरत भर विधायकों से इस्तीफा कराया, अपनी सरकार बनाई और अब उसे स्थिर भी कर दिया। इससे एक प्रादेशिक क्षत्रप के तौर पर येदियुरप्पा की ताकत जाहिर हुई है। इससे भाजपा के दूसरे क्षत्रपों जैसे मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान या राजस्थान में वसुंधरा राजे की ताकत बढ़ेगी।

कर्नाटक का यह मैसेज है कि अगर वे अपना वोट बैंक बचाए रख पाते हैं तो केंद्रीय नेतृत्व को झक्ख मार कर उनका नेतृत्व स्वीकार करना होगा। हरियाणा और महाराष्ट्र में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के बनाए क्षत्रपों की कमान में पार्टी का जैसा प्रदर्शन हुआ उससे भी पार्टी के पुराने क्षत्रपों का हौसला बढ़ा है। माना जा रहा है कि झारखंड के नतीजों के बाद उनका हौसला और भी बढ़ेगा।

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