राजनीति| नया इंडिया| karnataka politics BS yeddyurappa येदियुरप्पा को संभालना अब भी मुश्किल

येदियुरप्पा को संभालना अब भी मुश्किल

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भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के कहने पर बीएस येदियुरप्पा ने मुख्य्मंत्री पद से इस्तीफा तो दे दिया पर पार्टी के लिए उनको संभालना अब भी मुश्किल हो रहा है। 75 साल से ज्यादा उम्र हो जाने के बावजूद वे राजनीतिक सक्रियता कम नहीं कर रहे हैं। उनको पता है कि भाजपा ने 75 साल से ज्यादा उम्र के नेताओं को रिटायर करने का अघोषित नियम बना रखा है। वे खुद इसका अपवाद थे, जो उनको 77 साल की उम्र तक पार्टी ने मुख्यमंत्री रहने दिया। सो, उनको समझ लेना चाहिए कि उनके लिए सक्रिय राजनीति के रास्ते अब बंद हो गए हैं। अगर वे चाहें तो पार्टी उनको राज्यपाल के तौर पर कहीं भेजने के बारे में सोच सकती है। लेकिन यह मुमकिन नहीं लग रहा है कि पार्टी में उनको कोई पद देकर सक्रिय राजनीति में रखा जाए। karnataka politics BS yeddyurappa

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बीएस येदियुरप्पा जान बूझकर इस बात को नहीं समझ रहे हैं। वे सक्रिय राजनीति से रिटायर नहीं हो रहे हैं और न राज्यपाल बनने को तैयार हैं। उन्होंने पूरे कर्नाटक की यात्रा की योजना बनाई है। वे राज्य का दौरा करेंगे और उन्होंने दावा किया है कि 2023 के चुनाव में फिर भाजपा की सरकार बनवाएंगे। भाजपा के शीर्ष नेता नहीं चाहते हैं कि वे प्रदेश का दौरा करें क्योंकि उनको लग रहा है कि इस तरह से वे अपना वोट और अपने समर्थकों को एकजुट कर रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि वे अपने दोनों बेटों- बीवाई राघवेंद्र और बीवाई विजयेंद्र के भविष्य की सुरक्षा के लिए राजनीति कर रहे हैं। ध्यान रहे राज्य में येदियुरप्पा को हटा कर बासवराज बोम्मई को मंत्री बनाया गया तो येदियुरप्पा के बेटे को मंत्री नहीं बनाया गया। उनकी करीबी शोभा करंदलाजे को जरूर केंद्र में मंत्री बनाया गया पर येदियुरप्पा के लिए बेटों का भविष्य सुनिश्चित करना ज्यादा जरूरी है।

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