कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाली में देर होगी

जम्मू कश्मीर में अलग अलग पार्टियों के नेताओं की रिहाई हो रही थी। किस्तों में हो रही रिहाई को देख कर लग रहा था कि जल्दी ही वहां हालात सामान्य हो जाएंगे। पर अब ऐसा नहीं लग रहा है। पिछले दिनों राज्य प्रशासन ने दो पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और मेहबूबा मुफ्ती के खिलाफ लोक सुरक्षा कानून, पीएसए लगा दिया। पीएसए के प्रावधान बेहद सख्त हैं। एक और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर पहले से पीएसए लगा हुआ है। उनकी पार्टी के एक बड़े नेता और पूर्व मंत्री नईम अख्तर पर भी पिछले हफ्ते पीएसए लगा दिया गया। पूर्व मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों पर पीएसए लगाने से स्पष्ट हो गया है कि अभी तत्काल वहां पर न तो सामान्य स्थिति बहाल होने जा रही है और न कोई राजनीतिक गतिविधि शुरू होने वाली हैं। हां, प्रशासन पंचायत चुनाव जरूर करा लेगा।

बहरहाल, कहा जा रहा है कि सुरक्षा बलों के पास ऐसे सबूत हैं, जिनसे इन पूर्व मुख्यमंत्रियों और कुछ दूसरे नेताओं की अलगाववादियों से साठगांठ जाहिर हुई है। कुछ ऑडियो टेप भी हैं। इस आधार पर प्रशासन इन नेताओं को नजरबंदी में ही रखेगा। खबर है कि यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों का एक और दौरा जल्दी ही घाटी मे होने वाला है। इसके जरिए यह संदेश दिया जा रहा है कि घाटी में सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है, राजनीतिक गतिविधियों बाधित हुई हैं। असल में सरकार नहीं चाहती है कि कोई भी अपरिपक्व कदम उठाया जाए। कश्मीर को लेकर जितनी आलोचना होनी थी, उतनी हो चुकी है। इसलिए हड़बड़ी में या आलोचना के असर में आकर सबको छोड़ा गया तो हो सकता है कि हालात बिगड़ जाएं। इस समय नागरिकता कानून को लेकर भी विवाद चल रहा है। तभी सरकार अभी इंतजार करेगी।

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