कश्मीर के विपक्षी एजेंडे से भाजपा की मदद

जम्मू कश्मीर में विपक्षी पार्टियां एकजुट होने लगी हैं। फारूक अब्दुल्ला ने जेल से रिहा होने के तुरंत बाद अपने गुपकर रोड स्थिति आवास पर सभी विपक्षी पार्टियों के साथ बैठक की थी। इसे गुपकर समूह कहा जा रहा है और गुपकर प्रस्ताव के नाम से राजनीतिक एजेंडा भी तय हुआ है। अब्दुल्ला पिता-पुत्र के बाद जेल से रिहा हुई महबूबा मुफ्ती भी इस गुपकर समूह में शामिल हो रही हैं। उनके रिहा होने के तुरंद बाद अब्दुल्ला पिता-पुत्र उनसे मिलने गए और उसके बाद गुरुवार को एक फारूक अब्दुल्ला के आवास पर औपचारिक मीटिंग का फैसला हुआ। इस मीटिंग में या पहले की बैठकों में जो एजेंडा तय हो रहा है वह भाजपा को फायदा पहुंचाने वाला साबित हो सकता है। विपक्षी पार्टियों को इसका अंदाजा है इसके बावजूद उनका अपना आकलन है कि अगर पूरा विपक्ष एक हो जाए तो भाजपा को रोक सकते हैं।

ध्यान रहे मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवार एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं। लेकिन जैसे बिहार में लालू-नीतीश मिले, उत्तर प्रदेश में मुलायम-मायावती मिले, महाराष्ट्र में कांग्रेस-शिव सेना मिले उसी तरह कश्मीर में पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस आपस में मिल रहे हैं और कहा जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी भी इसमें शामिल होगी। इन सभी पार्टियों का एजेंडा यह है कि अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए बहाल कराना है। हो सकता है कि जम्मू कश्मीर के लोगों के लिए यह एक भावनात्मक मुद्दा हो, जिस पर पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस पार्टी को राजनीतिक सफलता की संभावना दिख रही हो पर यह एजेंडा न तो व्यावहारिक है और न संभव है। अब इन पार्टियों को भूल जाना चाहिए अनुच्छेद 370 फिर बहाल होगा। सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी कम से कम दिल्ली में इसकी मांग नहीं कर रही है। जो भी पार्टी इसकी मांग करेगी, पूरे देश में उसे नुकसान होगा।

इसलिए मेहबूबा मुफ्ती का यह कहना कि कश्मीर के लोगों से जो छीना गया है वह वापस दिलाएंगे, अंततः भाजपा को फायदा पहुंचाएगा। इसी तरह कांग्रेस पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस तीनों मिल कर विधानसभा का चुनाव लड़ते हैं तो उससे भाजपा की राह आसान होगी। परिसीमन के बाद वैसे ही विधानसभा सीटों की संख्या बढ़नी है और जनसंख्या संरचना भी बदलनी है। ऐसे में भाजपा बनाम समूचा विपक्ष का चुनाव बनता है तो राज्य में भाजपा की सरकार बनने की वास्तविक संभावना दिखती है।

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