केजरीवाल, राहुल, ममता, मोदी सब भक्त! - Naya India
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केजरीवाल, राहुल, ममता, मोदी सब भक्त!

इन दिनों भारतीय राजनीति का भक्ति काल चल रहा है। पहले नेता पूजा-पाठ करते थे तो वह उनका निजी मामला होता था। नेता चाहे किसी भी धर्म का हो वह अपनी आस्था के मुताबिक पूजा-पाठ करता था। लेकिन अब नेता खुल कर ऐलान कर रहे हैं कि वे किस भगवान के भक्त हैं। राजनीति के इस भक्ति काल से पहले भाजपा अकेली पार्टी थी, जो राजनीति के लिए भगवान राम के नाम का इस्तेमाल करती थी। उसके नेता जय श्रीराम के नारे लगाते थे और अयोध्य में राम मंदिर निर्माण की सौगंध खाते थे। इसके अलावा शिव सेना के नाम में शिव जरूर है पर वह शिवाजी महाराज की वजह से है। उसके नेता भी राम भक्त ही थे। भाजपा और शिव सेना की राम भक्ति के अलावा अलग अलग भगवानों के भक्त नेताओं की फौज आ गई है।

जैसे कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को खुद को शिव भक्त कहा है। उन्होंने कुछ समय पहले कथा भी सुनाई थी कि कैसे कर्नाटक जाते समय उनका हवाई जहाज एकदम नीचे गिरने लगा और तब उन्होंने मन्नत मांगी थी कि वे कैलाश मानसरोवर की यात्रा करेंगे। वे सचमुच कैलाश मानसरोवर गए और उससे पहले पैदल केदारनाथ धाम भी गए थे। सो, वे घोषित शिव भक्त हैं। पिछले दिनों दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में भाषण देते हुए कहा कि वे हनुमान भक्त हैं। पिछले चुनाव में अपने नामांकन और विजय के बाद वे दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर गए थे और उनकी पार्टी ने दिल्ली में जगह जगह हनुमान चालीसा के पाठ कराने का ऐलान भी किया था।

उधर पश्चिम बंगाल में जय श्रीराम के नारे पर चुनाव लड़ रही भारतीय जनता पार्टी को टक्कर देने के लिए ममता बनर्जी ने खुद को मां दुर्गा का भक्त कहा है। उन्होंने कहा है कि वे काली की पूजा करती हैं और चंडी पाठ करके निकलती हैं। उन्होंने चुनावी सभा के मंच पर चंडी पाठ किया। भाजपा के कुछ नेताओं ने उनके चंडी पाठ को तंत्र-मंत्र से जोड़ दिया है तो कई लोग वीडियो सुना कर बता रहे हैं कि उन्होंने गलत चंडी पाठ किया और उसी वजह से घायल हुई हैं। बहरहाल, नेताओं की भक्ति देख कर किसी ने सोशल मीडिया में लिखा है कि अच्छा है, जो अभी तक किसी ने अपने को सरस्वती का भक्त नहीं कहा है। यह भी कहा जा रहा है कि भक्ति चाहे महादेव की दिखाई जाए, या काली की या जय श्रीराम की, असली भक्ति लक्ष्मी की ही होती है।

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