संघीय व्यवस्था में अभूतपूर्व टकराव

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केंद्र सरकार जिस तरीके से और जिस रफ्तार से अपनी विरोधी पार्टियों और उनकी सरकारों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है वह अभूतपूर्व है। लेकिन उसी रफ्तार से टकराव भी बढ़ रहा है और टकराव जिस नए स्तर पर पहुंच गया है वह भी अभूतपूर्व है। केरल की सरकार ने केंद्रीय एजेंसियों के कामकाज की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और एक सदस्यीय न्यायिक आयोग भी बना दिया है। इससे पहले विपक्षी पार्टियों की सरकारों ने केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को अपने राज्य में किसी तरह के जांच के लिए दी गई इजाजत वापस ली थी। यह टकराव का एक मुकाम था। कई राज्यों ने ऐसा किया था और सीबीआई को दी गई जेनरल कंसेंट वापस ले ली थी। लेकिन दूसरी कई एजेंसियां हैं, जिनको राज्य सरकार की इजाजत की जरूरत नहीं है। वे मनमाने तरीके से छापे मारना जारी रखे हुए हैं।

इसी को लेकर केरल सरकार ने यह अभूतपूर्व पहल की है। राज्य सरकार का आरोप है कि केंद्रीय जांच एजेंसियां लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई एक सरकार के रोजमर्रा के कामकाज में दखल दे रही है और उसे अपनी जिम्मेदारी निभाने से रोक रही हैं। गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से कस्टम विभाग सोने और डॉलर की तस्करी की जांच कर रहा है और इस सिलसिले में सीपीएम के कई नेताओं को नोटिस भेजा गया है। सीपीएम का आरोप है कि भाजपा के कहने पर एजेंसी ने आरोपियों पर दबाव डाल कर पार्टी नेताओं को इस मामले में फंसाने का प्रयास किया है।

गुरुवार को आय कर विभाग ने केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड के मुख्यालय पर छापा मार दिया। इसके बाद ही पी विजयन की सरकार ने कैबिनेट की बैठक में न्यायिक जांच की मंजूरी दी और हाई कोर्ट के रिटायर जज जस्टिस वीके मोहन कुमार की अध्यक्षता में एक कमेटी बना दी। यह कमेटी एनआईए, सीबीआई, ईडी, आय कर विभाग और कस्टम विभाग के कामों की जांच करेगी। जल्दी ही इस मसले पर कानूनी टकराव शुरू होगा।

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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