विजयन और विजयराघवन की मनमानी - Naya India
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विजयन और विजयराघवन की मनमानी

जिस तरह से कांग्रेस पार्टी के प्रादेशिक क्षत्रप पार्टी आलाकमान की पकड़ से बाहर निकल गए हैं और अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं। उसी तरह देश की सबसे बड़ी कम्युनिस्ट पार्टी सीपीएम की केरल ईकाई पार्टी आलाकमान के हाथ से निकल गई है। पार्टी के महासचिव सीताराम येचुरी की वहां कोई नहीं सुन रहा है। पूर्व महासचिव प्रकाश करात का वरदहस्त केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन के ऊपर रहा है। सो, उनके दम से अब विजयन मनमानी कर रहे हैं। उनको इस काम में पार्टी के राज्य सचिव और एलडीएफ के समन्वयक ए विजयराघवन का साथ मिल गया है।

विजयन और विजयराघवन ने ही मिल कर यह फॉर्मूला बनाया कि दो बार विधायक रहे नेताओं को टिकट नहीं देंगे। पार्टी के जीत जाने के बाद इन दोनों ने ही फॉर्मूला बनाया कि पिछली सरकार के किसी नेता को मंत्री नहीं बनाएंगे। इसका सबसे बड़ा फायद इन्हीं दोनों को हुआ। विजयन खुद मुख्यमंत्री बन गए और अपने दामाद पीए मोहम्मद रियाज को मंत्री बना लिया। दूसरी ओर विजयराघवन पार्टी के राज्य सचिव हैं और उनकी बेटी वीणा जॉर्ज राज्य सरकार की मंत्री बन गईं।

इन दोनों की इस मिलीभगत को लेकर सीपीएम और सीपीआई दोनों के अंदर नाराजगी है। सीपीआई की नेता कविता कृष्णन ने खुल कर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहीं केके शैलजा को मंत्री नहीं बनाने के जो भी तर्क दिए गए हैं सब बेकार हैं। ध्यान रहे शैलजा ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में सबसे बेहतरीन काम किया और उससे पहले 2018 के नीपा वायरस के समय और 2019 में बाढ़ के समय भी उन्होंने शानदार काम किया था।

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