Lakhimpur Kheri Violence Democracy लोकतंत्र और पार्टियों की गुरिल्ला तकनीक
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लोकतंत्र और पार्टियों की गुरिल्ला तकनीक

Lakhimpur Kheri Violence Democracy

भारत में यह कैसा लोकतंत्र है कि विपक्षी पार्टियों को अपना विरोध प्रदर्शन करने के लिए गुरिल्ला तकनीक अपनानी पड़ रही है? उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक भाजपा नेता की गाड़ी किसानों पर चढ़ा कर उन्हें रौंदा गया, जिसमें चार किसानों की जान चली गई और एक पत्रकार सहित कुल आठ लोग मरे। उस घटना का विरोध करने के लिए विपक्षी पार्टियों को गुरिल्ला तकनीक का सहारा लेना पड़ रहा है, वरना राज्य सरकार उनको विरोध प्रदर्शन भी नहीं करने दे रही है। जो नेता लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने गए उनको या तो हवाईअड्डे से बाहर ही नहीं निकलने दिया या फिर रास्ते में गिरफ्तार कर लिया गया। प्रियंका गांधी को पहले 30 घंटे हिरासत में रखा गया और उसके बाद गिरफ्तार कर लिया गया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हवाईअड्डे से नहीं निकलने दिया गया। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ ऐसा ही बरताव किया गया। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी लखनऊ में ही रोक दिया गया। Lakhimpur Kheri Violence Democracy

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इन सबके बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की दो महिला सांसद लखीमपुर खीरी पहुंच गईं। राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी भी पुलिस को चमका देकर लखीमपुर खीरी पहुंच गए। इन दोनों पार्टियों के नेताओं ने गुरिल्ला तकनीक का सहारा लिया। जयंत चौधरी की पार्टी के कुछ नेताओं ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उनको मुंह ढक कर पुलिस बचते हुए पैदल जाते दिखाया गया है। इसी तरह तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार और सुष्मिता देब भी लखीमपुर खीरी पहुंचे और मीडिया से बात करके अपना विरोध जताया। तृणमूल की ओर से भी कहा गया कि उसकी दोनों सांसद गुरिल्ला तकनीक का इस्तेमाल करके वहां तक पहुंचे। सोचें, दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने या पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए अगर ऐसे तरीके अपनाने होंगे तो लोकतंत्र के बारे में क्या कहा जा सकता है।

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