पांच अगस्त के शिलान्यास का मतलब

ऐसा बताया गया था कि राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने राममंदिर के शिलान्यास के लिए प्रधानमंत्री को तीन और पांच अगस्त की दो तारीखें भेजी थीं। ज्यादातर लोग मान रहे हैं और सही भी मान रहे हैं कि यह सिर्फ दिखावा था, जिसका मकसद यह मैसेज देना था कि फैसले ट्रस्ट की ओर से हो रहे हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि सरकार की ओर से पांच अगस्त की तारीख तय की गई है। राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने उस हिसाब से तैयारियां की हैं। वैसे भी तैयारियां ट्रस्ट से ज्यादा सरकार ही कर रही है। तभी मीडिया में यह भी खबर आई थी कि दो सौ मेहमानों की सूची को प्रधानमंत्री कार्यालय ने हरी झंडी दी। अगर आयोजन ट्रस्ट का होता तो उसे पीएमओ की मंजूरी की जरूरत नहीं होती। दूसरे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री हर दूसरे दिन तैयारियों का जायजा लेने अयोध्या जा रहे हैं।
बहरहाल, शिलान्यास के लिए पांच अगस्त की तारीख तय करने के लिए क्या तर्क है, यह तय करने वाले ही बता सकते हैं। पर कई लोगों को लग रहा है कि इसका एक संदर्भ है। उनका कहना है कि यह मामला जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाने से जुड़ा है। कहा जा रहा है कि पिछले साल पांच अगस्त को ही जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्ज खत्म किया गया था, राज्य का विभाजन हुआ था और लगभग सारे नेता गिरफ्तार करके जेल में डाले गए थे। इस आधार पर उनका कहना है कि इस तरह से राष्ट्रवाद और हिंदुत्व को जोड़ा जा रहा है और यहीं कारण है कि भादो के महीने में शुभ तिथि नहीं होने की आपत्तियों के बावजूद पांच अगस्त को शिलान्यास हो रहा है। उस दिन भाजपा जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा खत्म किए जाने के एक साल पूरे होने पर बड़े जश्न और समारोह की तैयारी भी कर रही है। दोनों चीजें एक साथ होंगी।

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