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राजरंग| नया इंडिया| liquor ban in bihar कानून तोड़ने वालों को मुआवजा क्यों मिले?

कानून तोड़ने वालों को मुआवजा क्यों मिले?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चौतरफा आलोचना झेल रहे हैं। शराबबंदी के बावजूद जहरीली शराब पीने से हुई 50 से ज्यादा लोगों की मौत के बाद वे अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी भाजपा के निशाने पर हैं तो सहयोगी पार्टी राजद में भी अंदरखाने नाराजगी है क्योंकि इस बार की घटना राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के गृह जिले में हुई है। इसके बावजूद नीतीश कुमार पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने दो टूक अंदाज में दो बातें कहीं। पहली बात, जो शराब पीयेगा वो मरेगा और दूसरी बात, शराब पीकर मरने वालों को मुआवजा नहीं दिया जाएगा। जाहिर है राज्य में जब शराबबंदी है तो उस कानून का उल्लंघन करके शराब पीने वालों को मुआवजा देने से एक गलत मिसाल बनेगी। इससे पहले कई जिलों में ऐसी घटना हुई है और सरकार ने किसी को मुआवजा नहीं दिया।

सरकार का रुख साफ होने के बाद नीतीश कुमार की पार्टी ने अपनी पुरानी सहयोगी और अब मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा पर पलटवार किया है। सोशल मीडिया में वैसे तो नीतीश की पार्टी की मौजूदगी ज्यादा नहीं है लेकिन उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने भाजपा शासित राज्यों में जहरीली शराब से हुई मौतों के आंकड़े निकाले हैं। ऐसे ही एक आंकड़े के मुताबिक जहरीली शराब पीने से सबसे ज्यादा मौतें मध्य प्रदेश में हुई हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भी जहरीली शराब से बिहार से ज्यादा मौतें हुई हैं। गुजरात में शराबबंदी के बावजूद वहां के बोटाड में जहरीली शराब से 50 के करीब लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा भाजपा के हमले का जवाब देते हुए जदयू ने यह भी कहा कि भाजपा 2017 से 2022 तक जदयू के साथ सरकार में थी और तब भी शराबबंदी लागू थी और तब भी जहरीली शराब से लोगों की मौत हुई, लेकिन भाजपा ने एक बार यह मुद्दा नहीं उठाया।

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