महाविकास अघाड़ी के भविष्य की अटकलें

महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी यानी शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस की ओर से चुने गए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अभी शपथ नहीं ली है और उससे पहले ही इस गठबंधन के भविष्य को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने कहा है कि उनको अजित पवार ने बताया कि अघाड़ी की तीनों पार्टियों में आपसी तालमेल नहीं बन पा रहा है। उनके कहने का मतलब यह था कि भाजपा को रोकने के लिए तीन पार्टियां साथ आ तो गई हैं पर चल नहीं पाएंगी।

एक तरफ उनके चलने का मामला है तो दूसरी तरफ उनको चलने देने की भाजपा की मंशा का मामला है। सबसे अहम सवाल भाजपा की मंशा का ही है कि क्या वह इस गठबंधन को चुपचाप काम करने देगी? भाजपा के दिल्ली में बैठे नेता मान रहे हैं कि भाजपा आसानी से इसे काम नहीं करने देगी। उनका कहना है कि भाजपा के पास दो मॉडल हैं- एक कर्नाटक का और दूसरा बिहार का। कर्नाटक मॉडल लागू करने के लिए देवेंद्र फड़नवीस को जोर लगाना होगा। पर भाजपा आलाकमान उनके भरोसे रह कर एक बार गच्चा खा चुका है।

तभी ज्यादा संभावना इस बात की है कि भाजपा आलाकमान बिहार मॉडल पर काम करे। जैसे पुराने सहयोगी नीतीश कुमार को राजद और कांग्रेस से अलग करके वापस एनडीए में लाया गया था उसी तरह थोड़े समय के बाद अपनी पुरानी वैचारिक सहयोगी और हिंदुवादी पार्टी शिव सेना को तैयार किया जाए कि वह भाजपा के साथ लौट आए। भाजपा इसके लिए शिव सेना का ही मुख्यमंत्री बनाए रखने का प्रस्ताव भी दे सकती है। इसमें दूसरा मॉडल एनसीपी को तोड़ कर साथ लाने का भी है।

उसके लिए भाजपा नेता अधिकतम सीमा ढाई साल की दे रहे हैं। उनको लग रहा है कि झगड़ा तो इससे पहले ही शुरू हो जाएगा पर ढाई साल में एनसीपी प्रमुख शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को मुख्यमंत्री बनाने का दांव चल सकते हैं। वे मुख्यमंत्री पद के बंटवारे का प्रस्ताव रख सकते हैं। भाजपा के नेता मान रहे हैं कि उद्धव ठाकरे इसके लिए तैयार नहीं होंगे और तभी उनके भाजपा के साथ लौटने का मौका बनेगा। भाजपा तब तक इंतजार करने को तैयार है।

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