कांग्रेस नेता प्रचार से दूर रहे

ऐसा नहीं है कि सिर्फ सोनिया व राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस के चुनाव प्रचार से दूर रहे। कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने भी प्रचार से दूरी बनाए रखी। कांग्रेस ने हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार के लिए पार्टी के 40-40 स्टार प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग को सौंपी थी पर दोनों राज्यों में आधे से ज्यादा स्टार प्रचारक गए ही नहीं। दोनों राज्यों में प्रचार स्थानीय नेताओं के हवाले रहा। चूंकि स्थानीय नेताओं में से भी कई बड़े चेहरे चुनाव लड़ रहे थे इसलिए वे भी पूरे राज्य में प्रचार के लिए नहीं जा सके और लगभग हर जगह उम्मीदवारों ने अपना प्रचार खुद किया।
सबसे हैरान करने वाला मामला हरियाणा का रहा, जहां बिल्कुल पड़ोसी राज्य पंजाब में कांग्रेस की सरकार है और हरियाणा में सिख व जाट वोट भी अच्छी खासी संख्या में हैं पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने प्रचार नहीं किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रचार में पाकिस्तान का पानी रोकने का वादा किया और करतारपुर कॉरीडोर शुरू कराने का श्रेय लिया। ये दोनों कैप्टेन अमरिंदर सिंह के एजेंडे हैं। वे प्रधानमंत्री मोदी का जवाब दे सकते थे पर उन्होंने प्रचार ही नहीं किया। क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू प्रचार में बड़ा असर डाल सकते थे पर वे भी नदारद रहे।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और कांग्रेस के युवा नेताओं में संभवतः सबसे लोकप्रिय रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम भी स्टार प्रचारकों में था पर वे भी प्रचार के लिए नहीं गए। कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की कमी कैसी रही इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हरियाणा में राजीव शुक्ला कांग्रेस के लिए रैली और सभा कर रहे थे।

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