महाराष्ट्र, झारखंड कांग्रेस का संकट

कांग्रेस पार्टी को महाराष्ट्र और झारखंड दोनों पर ध्यान देना चाहिए, जहां उसकी सहयोगी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस खुद सरकार में शामिल है। दोनों जगह कांग्रेस की स्थिति ठीक नहीं है। महाराष्ट्र में कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री से मिल कर शिकायत की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं तक ने सरकार के कामकाज को लेकर बयान दिया। नौकरशाही के सरकार चलाने के आरोप लगाए। जवाब में शिव सेना के मुखपत्र सामना में संपादकीय छपा, जिसमें बयान देने वाले कांग्रेस नेताओं को पुरानी खाट बताया गया और लिखा गया कि खटिया पुरानी है इसलिए चरमरा रही है। महाविकास अघाड़ी की पार्टी के नेताओं में चल रहे इस विवाद के बीच भाजपा के नेता देवेंद्र फड़नवीस ने यह शिगूफा छोड़ दिया कि शरद पवार तीन पार्टियों की गठबंधन सरकार के पक्ष में नहीं हैं और वे भाजपा के साथ सरकार बनाने की बात कर रहे थे।

उधर झारखंड में तो कांग्रेस के मंत्रियों और जेएमएम के नेताओं के समर्थक आपस में लड़ रहे हैं और मुकदमेबाजी हो रही है। कांग्रेस ने जबरदस्ती राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार उतार दिया, जिसकी वजह से चुनाव की नौबत आई और गुरुजी शिबू सोरेन का चुनाव पिछले हफ्ते तक लटका रहा। जेएमएम के नेता इस बात से नाराज थे कि अगर कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं दिया होता तो गुरूजी का चुनाव मार्च में ही निर्विरोध हो गया होता। पिछले हफ्ते चुनाव हुआ तो गुरूजी को 30 और भाजपा के उम्मीदवार को 31 वोट आए, जबकि भाजपा के अपने विधायकों की संख्या 26 ही है। इसके बाद से भाजपा के नेता उत्साहित हैं और इस बात की तैयारी में हैं कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश की कहानी दोहरा दी जाए। झारखंड में दो सीटों के उपचुनाव होने हैं, उसके बाद भाजपा वहां भी ऑपरेशन लोटस शुरू करेगी। लेकिन ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस नेताओं को इसकी परवाह नहीं है।

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