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50 विधायकों पर भारी 15 विधायक

एक तरफ 50 विधायक हैं, जिनमें शिव सेना के 38 और 12 निर्दलीय विधायक हैं। ध्यान रहे महाराष्ट्र का कोई विधायक कमजोर नहीं होता है। उसका अपना आधार होता है और वह आर्थिक रूप से मजबूत होता है। सो, 50 विधायकों की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऊपर से उनके साथ भारतीय जनता पार्टी है, जिसके पास अपने सहयोगियों सहित 114 विधायक हैं। भाजपा अपने आप में सक्षम पार्टी है, जिसनें पिछली विधानसभा में पांच साल सरकार चलाई थी। देश की सरकार उसकी है और केंद्रीय एजेंसियों की तलवार नेताओं के सर पर लटकी है। राज्य की नौकरशाही भी भाजपा का साथ देने में अपना भला समझ रही है। इसके बावजूद शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के साथ बचे हुए 15 विधायक भारी पड़ रहे हैं।

सवाल है कि शिव सेना के 38 और 12 निर्दलीय विधायक अपनी ताकत क्यों नहीं दिखा रहे हैं? क्यों नहीं इन विधायकों के समर्थक सड़कों पर निकल रहे हैं और खुल कर बोल रहे हैं कि इन विधायकों ने सही किया है? इन विधायकों के कार्यालयों पर हमले हो रहे हैं तो उनके समर्थक क्यों नहीं इन हमलों को रोकने का काम कर रहे हैं? क्या इक्का-दुक्का जगहों को छोड़ कर कहीं भी इन विधायकों के समर्थक सड़क पर नहीं निकले हैं। कायदे से तो अपनी सरकार बनने की खुशी में भाजपा के समर्थकों और उनके साथ इन बागी विधायकों के समर्थकों को सड़क पर होना चाहिए था। लेकिन सब घरों में दुबके पड़े हैं। शिव सेना के बागी विधायकों के समर्थन में लोगों के बाहर नहीं निकलने का नतीजा यह हुआ है कि शिव सेना मजबूत हुई है। उद्धव की ताकत बढ़ी है और पहले दिन जो झटका लगा था उससे उबरने में उनको मदद मिली है।

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