फड़नवीस को पार्टी में होगी मुश्किल!

महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी तो गंवा ही दी है साथ ही पांच साल सरकार चला कर जो साख बनाई थी वह भी गंवा दी है। अगर वे सरकार बनाने की पहल नहीं करते और आनन-फानन में आधी रात का ऑपरेशन चला कर मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं लेते तो उनकी साख बची रहती और नेतृत्व भी बचा रहता। ऊपर से उन्होंने सिंचाई घोटाले के आरोपी अजित पवार का समर्थन लेकर, उनको उप मुख्यमंत्री बना कर भी अपनी साख बिगाड़ी है। तभी कहा जा रहा है कि पार्टी के अंदर उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आने वाले दिनों में उनको विधायक दल के नेता पद से हटाने की मांग भी हो सकती है।

ध्यान रहे भाजपा आलाकमान ने लोकसभा चुनावों से ठीक पहले मराठा नेता चंद्रकांत पाटिल को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। उनको पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का करीबी माना जाता है। यह भी कहा जाता है कि अमित शाह उनको ही मुख्यमंत्री बनवाना चाहते थे। पार्टी के जानकार सूत्रों का कहना है कि अब चंद्रकांत पाटिल की ताकत और बढ़ेगी। जब देवेंद्र फड़नवीस मुख्यमंत्री थे तब भी पाटिल प्रदेश में एक दूसरा पावर सेंटर थे। अब तो फड़नवीस मुख्यमंत्री नहीं हैं तो पाटिल की ताकत बढ़ेगी।

फड़नवीस की एक सीमा यह भी है कि वे ब्राह्मण हैं और विदर्भ से आते हैं। केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी भी ब्राह्मण हैं और विदर्भ के हैं। सो, माना जा रहा है कि गडकरी का समर्थन फड़नवीस को नहीं मिलेगा। इसका मतलब है कि दो मजबूत लॉबी ऐसी होगी, जो उनका समर्थन नहीं करेगी। महाराष्ट्र के ड्रामे से भाजपा के दोनों शीर्ष नेताओं नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जैसी किरकिरी हुई है उसे देख कर भी लग रहा है कि देवेंद्र फड़नवीस को उनका वैसा समर्थन नहीं मिलेगा, जैसा पहले मिलता रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी में मराठा और ओबीसी नेतृत्व आगे बढ़ाने की मांग होगी। पहले भी भाजपा इसी समीकरण पर काम करती रही है।

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