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Wednesday, May 12, 2021
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एनसीपी नहीं, शिव सेना खतरे में!

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महाराष्ट्र में सत्ता और राजनीति का समीकरण तेजी से बदल रहा है। राज्य सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन को संकट में डालने वाला जो विवाद शरद पवार की पार्टी एनसीपी के नेता अनिल देशमुख से शुरू हुआ था उसके जाल में शिव सेना फंसती दिख रही है। अहमदाबाद में अमित शाह के साथ शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल की हुई कथित मुलाकात के बाद तेजी से समीकरण बदला है। अनिल देशमुख ने तो गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया लेकिन उसके बाद अब सारा निशाना शिव सेना के ऊपर हो गया है।

वैसे कई जानकार नेताओं का यह भी कहना है कि अनिल देशमुख का इस्तीफा एनसीपी या शरद पवार के लिए झटका नहीं है क्योंकि वे असल में जिसे गृह मंत्री बनाना चाहते थे वह बन गया। ध्यान रहे अनिल देशमुख के इस्तीफे के बाद दिलीप वलसे पाटिल को नया गृह मंत्री बनाया गया है। कुछ दिन पहले ही शिव सेना के सांसद संजय राउत ने कहा था कि अनिल देशमुख एक्सीडेंटल गृह मंत्री हैं, शरद पवार असल में जितेंद्र पाटिल या दिलीप वलसे पाटिल को गृह मंत्री बनाना चाहते थे। इस लिहाज से अनिल देशमुख के इस्तीफे से एनसीपी को कोई नुकसान नजर नहीं आ रहा है।

लेकिन दूसरी ओर एंटीलिया कांड से लेकर मनसुख हिरेन की मौत और सैकड़ों करोड़ रुपए की वसूली के आरोपों के घेरे में शिव सेना आ गई है। केंद्रीय एजेंसियों की जांच धीरे धीरे शिव सेना के बड़े नेताओ की ओर बढ़ रही है। मुकेश अंबानी के बंगले के बाहर विस्फोटक से भरी गाड़ी खड़ी करने और गाड़ी के मालिक मनसुख हिरेन की हत्या के आरोप में जेल में बंद पुलिस अधिकारी सचिन वझे का बयान या उनका चिट्ठी लिखना मामूली बात नहीं है। यहां तक कि अदालत ने भी इस पर सवाल उठाया है।

जेल में बंद वझे ने शिव सेना नेताओं को उलझा दिया है। उसने वसूली के मामले में अनिल देशमुख के साथ साथ शिव सेना के बड़े नेता और राज्य सरकार के मंत्री अनिल परब का भी नाम लिया है और कहा कि परब ने उससे सेवा में बने रहने के लिए दो करोड़ रुपए मांगे थे। सोचें, बकौल देवेंद्र फड़नवीस जिस अधिकारी की सेवा बहाल करने के लिए खुद उद्धव ठाकरे ने उनसे पैरवी की थी, उससे शिव सेना का कोई नेता दो करोड़ रुपए मांगे, क्या यह बात गले उतरती है? लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसियों के शिकंजे में फंसे वझे ने कहा कि परब ने उनसे दो करोड़ रुपए मांगे थे। इतना ही नहीं वझे ने मुंबई में इनकाउंटर के लिए मशहूर रहे पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा का भी नाम लिया है। तभी राष्ट्रीय जांच एजेंसी, एनआईए ने दो दिन प्रदीप शर्मा से पूछताछ की। ध्यान रहे प्रदीप शर्मा सेवा से इस्तीफा देकर शिव सेना में शामिल हो गए हैं और पिछला चुनाव उन्होंने शिव सेना की टिकट से लड़ा था। वे शिव सेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के करीबी हैं। सो, अनिल परब और प्रदीप शर्मा का नाम लेकर वझे ने शिव सेना की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

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