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बीएमसी चुनाव से पहले कंफ्यूजन

महाराष्ट्र में अगले साल बृहन्नमुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी का चुनाव है। राज्य में विधानसभा चुनाव के जितना ही महत्वपूर्ण यह चुनाव भी होता है। कम से कम शिव सेना के लिए बीएमसी का चुनाव विधानसभा की तरह की महत्व रखता है। पिछले 25 साल से बीएमसी पर शिव सेना का कब्जा है और वह किसी तरह से इसे बचाए रखने की प्रयास कर रही है। लेकिन उस चुनाव से पहले ही महाविकास अघाड़ी की तीनों पार्टियों के बीच कंफ्यूजन पैदा हो गया है। कांग्रेस और एनसीपी दोनों के सुर अलग दिख रहे हैं।

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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कंफ्यूजन और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा है कि अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरेगी। मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भाई जगताप ने कहा है कि बीएमसी का चुनाव कांग्रेस अकेले लड़ेगी। इसके बाद एनसीपी के प्रवक्ता और राज्य सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने कहा कि तीनों पार्टियों में सरकार चलाने पर तो सहमति है लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव मिल कर लड़ना है या नहीं, ये बात तय नहीं हुई है।

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इस बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल आए और कह दिया कि उनके संबंध खत्म नहीं हुए हैं। ध्यान रहे पिछले बीएमसी चुनाव में शिव सेना और भाजपा की सीटों में बहुत कम अंतर था। सो, संभव है कि भाजपा समर्थक हिंदुवादी वोटों की चिंता में उद्धव ने मोदी से तार जोड़े हों। शिव सेना को अंदाजा है कि कांग्रेस और एनसीपी के साथ होने के बावजूद मुस्लिम वोट मिलना मुश्किल है। प्रवासियों का वोट भी बहुत नहीं मिलेगा। इसलिए पार्टी को अपने कोर मराठी और हिंदुवादी वोटों पर ही निर्भर रहना है। तभी वहां आगे की राजनीति बहुत दिलचस्प होने वाली है।

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