फड़नवीस की सक्रियता पर कयास

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस की सक्रियता को लेकर कई कयास लगाए जाने लगे हैं। हालांकि महाराष्ट्र की सभी पार्टियों के नेता मान रहे हैं कि अभी तत्काल राज्य में कोई राजनीतिक हलचल नहीं होने वाली है क्योंकि महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का खतरा बहुत बढ़ गया है। राज्य में तीन लाख से ज्यादा कोरोना संक्रमित हैं और मुंबई में संक्रमितों की संख्या एक लाख से ऊपर चली गई है। ऐसे में कोई राजनीतिक उथल-पुथल नहीं हो सकती है पर कोरोना के बाद अगर कोई राजनीतिक हलचल होती है तो फड़नवीस उसके केंद्र में होंगे। वे नेता प्रतिपक्ष हैं और पिछले कुछ दिनों से उन्होंने अपनी सक्रियता काफी बढ़ाई है।

वे दिल्ली आए थे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से कहा कि महाराष्ट्र में कोई ऑपरेशन लोट्स नहीं चल रहा है यानी सरकार बदलने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे किसी प्रोजेक्ट के लिए केंद्र की मंजूरी और फंड के बारे में बात करने आए थे पर यह तर्क किसी के गले नहीं उतरने वाला है। बातचीत का विषय को राजनीतिक ही रहा होगा। इस बीच महाराष्ट्र में शिव सेना ने अचानक फड़नवीस की तारीफ शुरू कर दी। पार्टी के मुखपत्र सामना में लिखा गया कि बतौर नेता विपक्ष फड़नवीस काफी अच्छा काम कर रहे हैं। असल में फड़नवीस ने उससे पहले कोरोना मामले में सरकार के कामकाज की तारीफ की थी और कहा था कि उन्हें अगर कोरोना का संक्रमण हुआ तो वे किसी निजी अस्पताल में जाने की बजाय सरकारी अस्पताल में भरती होंगे। इसे लेकर भी शिव सेना ने उनका आभार जताया। यह आभार जताने, धन्यवाद करने और एक-दूसरे की तारीफ करने से कयासों को हवा मिली है। कहा जा रहा है कि जब से शरद पवार ने कहा है कि 2014 में उन्होंने शिव सेना को भाजपा से दूर रखने के लिए भाजपा की सरकार को समर्थन दिया था, तब से शिव सेना के नेता उनको लेकर आशंकित हैं और इसलिए अपनी पुरानी सहयोगी के प्रति सद्भाव दिखा रहे हैं।

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