महाराष्ट्र में भाजपा किसके खिलाफ?

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यह हैरान करने वाली खबर है कि भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एनसीपी के प्रमुख शरद पवार और उनके डिप्टी प्रफुल्ल पटेल से मुलाकात की। बताया जा रहा है कि अहमदाबाद में एक बड़े कारोबारी के यहां शनिवार को रात 11 बजे के बाद इन तीनों नेताओं की मुलाकात हुई, जो करीब 45 मिनट तक चली। एनसीपी नेताओं के इनकार के बावजूद भाजपा नेता मुलाकात होने का संकेत दे रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि इस मुलाकात से गदगद भी हैं। तभी अगले दिन प्रेस कांफ्रेंस में अमित शाह ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि सारी बातें सार्वजनिक नहीं की जाती हैं। भाजपा के महाराष्ट्र के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने भी कहा कि अमित शाह और पवार की मुलाकात कोई असामान्य बात नहीं है।

अगर अमित शाह और शरद पवार की मुलाकात हुई है, जिसकी पुष्टि कई तरह से हो रही है तो सवाल है कि भाजपा महाराष्ट्र में किसके खिलाफ है? मुकेश अंबानी की सुरक्षा में सेंध से लेकर मनसुख की हिरेन हत्या और परमबीर सिंह के तबादले से लेकर हर महीने एक सौ करोड़ रुपए की वसूली करने के मामले में भाजपा का विरोध तो एनसीपी से ही है! आखिर राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख हैं, जो एनसीपी के नेता हैं और शरद पवार से लेकर एनसीपी के तमाम नेता उनका बचाव कर रहे हैं! मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अनिल देशमुख को हटाना चाहते हैं और भाजपा की मांग भी अनिल देशमुख को बरखास्त करने की है लेकिन भाजपा के दूसरे सबसे बड़े नेता अमित शाह उन्हीं अनिल देशमुख के सरपरस्त शरद पवार से गुप्त मीटिंग करते हैं और पूरी पार्टी इस मीटिंग के बाद बड़ी बड़ी उम्मीदें बांधने लगती है!

ध्यान रहे महाराष्ट्र भाजपा के नेताओं ने अनिल देशमुख के साथ साथ शरद पवार को भी निशाना बनाया है। पवार ने दो दिन लगातार प्रेस कांफ्रेंस करके देशमुख का बचाव किया और तब महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने पवार पर भी हमला किया। यह सवाल भी उठाया है कि पवार किस हैसियत से मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह से मिलते थे और ब्रीफिंग लेते थे। कुल मिला कर महाराष्ट्र में जो अव्यवस्था बनी है, देश के सबसे बड़े उद्योगपति से रंगदारी वसूलने की साजिश का जो खुलासा हुआ है और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, सबमें आरोपी एनसीपी और उसके नेता हैं। पवार के साथ जो दूसरे नेता अमित शाह से मिले थे उनके खिलाफ भी सीबीआई, ईडी आदि की जांच चल रही है।

सो, अगर सारी फसाद की जड़ एनसीपी है तो भाजपा उसके साथ क्यों तार जोड़ रही है? उसे तो केंद्रीय एजेंसियों की जांच के जरिए एनसीपी की पोल खोलनी चाहिए और आरोपी नेताओं पर कार्रवाई करनी चाहिए लेकिन उलटे अमित शाह उसी के साथ तार जोड़ रहे हैं? असल में यह भाजपा का तरीका है। वह जिस पार्टी पर सबसे ज्यादा हमले करती है, आरोप लगाती है, भ्रष्ट और देशद्रोही ठहराती है, उसके साथ तालमेल करने में भी उसे कोई दिक्कत नहीं होती है। एनसीपी के बाहरी समर्थन से भाजपा ने महाराष्ट्र में अपनी पहली सरकार बनाई थी।

इसे भी पढ़ें – पवार की राजनीति का स्टाइल

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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