महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन कतई नहीं

महाराष्ट्र सरकार को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान के बाद इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या महाराष्ट्र में सरकार अस्थिर है और गिर सकती है? यह चर्चा दो स्तर पर हो रही है। एक तो भाजपा के प्रदेश नेता बेचैन हैं कि किसी तरह से उद्धव ठाकरे की सरकार गिराई जाए। इसलिए वे कोराना वायरस के संक्रमितों की बढ़ती संख्या के हवाले राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग कर रहे हैं। दूसरी चर्चा यह है कि उद्धव सीधे दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के संपर्क में हैं और कभी भी गठबंधन बदल का बिहार जैसा खेल महाराष्ट्र में हो सकता है। राहुल के बयान के बाद इस तरह की चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

उनके मोदी और शाह के संपर्क में होने की बात का एक संकेत शिव सेना संजय राउत के बयान से भी मिला। राष्ट्रपति शासन लागू होने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर राउत ने कहा कि उन्होंने यह बात अभी प्रधानमंत्री मोदी या गृह मंत्री अमित शाह से नहीं सुनी है इसलिए इसका कोई मतलब नहीं है। बहरहाल, भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि अभी राष्ट्रपति शासन लगाने का कोई इरादा नहीं है। इसके दो कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण तो यह है कि कोरोना वायरस के इस पीक संकट के समय अगर सरकार अस्थिर की जाती है तो उसका गलत मैसेज जाएगा। भाजपा की छवि पर उसका असर होगा। और दूसरे, कोरोना वायरस से लड़ने के मामले में आमतौर पर उद्धव ठाकरे के काम की तारीफ हो रही है।

महाराष्ट्र में कोरोना के केसेज ज्यादा होने के बावजूद यह माना जा रहा है कि वे टेस्टिंग, ट्रेसिंग के जरिए कोरोना के मरीजों को तलाश कर उनका इलाज कर रहे हैं। तभी उनकी सरकार को हटाना ठीक नहीं होगा। एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि भाजपा नेतृत्व अब भी शिव सेना के एनडीए में लौटने को लेकर आशान्वित है इसलिए वह सरकार गिरा कर शिव सेना को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती है।

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