कांग्रेस, राहुल क्यों ऐसी बात कर रहे?

कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के कई राजनीतिक बयान सेल्फगोल की तरह होते हैं, आत्मघाती होते हैं। कोरोना वायरस, मजदूरों की समस्या, आर्थिक तबाही आदि मसलों पर वे जितनी अच्छी बातें कर रहे हैं, राजनीतिक मसलों पर उतनी की उलटी बात कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस की तो महाराष्ट्र पर बहुत विस्तार से राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार नहीं चला रही है, बल्कि सरकार को समर्थन दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सिर्फ पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान और पुड्डुचेरी में सरकार चला रही है और वहां निर्णय करने की स्थिति में है।

यह बयान राजनीतिक रूप से भी गलत है और तथ्यात्मक रूप से भी गलत है। महाराष्ट्र में कांग्रेस सरकार को समर्थन नहीं दे रही है, बल्कि सरकार में शामिल है और सरकार चला रही है। उसके मंत्री कैबिनेट का हिस्सा हैं और अगर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कोरोना वायरस का संकट संभालने से लेकर किसी भी मसले पर कोई ऐसा फैसला कर रहे हैं, जो कांग्रेस को पसंद नहीं है तो कांग्रेस के मंत्री कैबिनेट में इसका विरोध कर सकते हैं या सार्वजनिक रूप से उसका विरोध कर सकते हैं। पर प्रदेश सरकार में शामिल कांग्रेस के किसी मंत्री ने किसी नीति का विरोध नहीं किया है। यानी कांग्रेस हर नीति-निर्णय में शामिल है और उससे सहमत है। फिर राहुल के इस बयान का क्या मतलब है? सरकार के विरोध में जो बयान आए हैं वे पृथ्वीराज चव्हाण या संजय निरूपम जैसे नेताओं के हैं, जो सरकार से बाहर हैं और अपनी निजी खुन्नस में बयानबाजी कर रहे हैं।

राहुल का यह बयान ऐसे दिन आया, जिसके दो दिन पहले ही उद्धव ठाकरे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बुलाई विपक्षी पार्टियों की बैठक में शामिल हुए थे। विधान परिषद चुनाव के मसले पर हुई राजनीति के बाद उद्धव का भाजपा के केंद्रीय नेताओं के प्रति सद्भाव बढ़ा है। तभी राहुल के बयान की टाइमिंग भी ठीक नहीं है। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में कई स्तर पर कंफ्यूजन बन गया है। राहुल के ऐसे गैरजिम्मेदार और तथ्यात्मक रूप से गलत बयान कांग्रेस के लिए नुकसानदेह हैं। मध्य प्रदेश में सरकार गंवाने के बाद कांग्रेस को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।

महाराष्ट्र के बारे में दिया गया राहुल का बयान झारखंड पर भी लागू होता है, जहां झारखंड मुक्ति मोर्चा की सरकार में कांग्रेस पार्टी शामिल है। वहां भी लग रहा है कि कांग्रेस आलाकमान यहीं मान रहा है कि उसने सरकार को समर्थन दिया है। सरकार में शामिल पार्टी के तौर पर कांग्रेस का राजनीतिक बरताव नहीं दिख रहा है। ध्यान रहे महाराष्ट्र और झारखंड इन दोनों राज्यों पर भाजपा की नजर है। दोनों जगह भाजपा मजबूत है- संगठन के तौर पर भी और विधायकों की संख्या के लिहाज से भी। इसलिए राहुल को सोच-समझ कर बयान देना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र और झारखंड की सरकार कांग्रेस के हाथ से निकल जाए।

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