शिव सेना की राजनीति दिलचस्प होगी

महाराष्ट्र में शिव सेना, एनसीपी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार की स्थिरता मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर है। पहली बात शरद पवार हैं और दूसरी बात शिव सेना के संतुलन बनाने की सीमा है। शिव सेना जब तक संतुलन बनाए रख सकती है, तब तक सरकार चलती रहेगी। नागरिकता संशोधन विधेयक पर शिव सेना ने इसका बेहतरीन नमूना पेश किया। उसने लोकसभा में बिल का समर्थन किया और राज्यसभा में विरोध करते हुए वाकआउट किया। कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नाराजगी जाहिर करने पर शिव सेना ने इस मामले में रुख बदला।

पर असल में यह बात पहले से तय थी। कांग्रेस को इससे फर्क नहीं पड़ता था कि शिव सेना लोकसभा में क्या करती है। लोकसभा में वैसे भी भाजपा के पास करीब चार सौ सांसदों का समर्थन है। कांग्रेस चाहती थी कि राज्यसभा में शिव सेना सरकार का विरोध करे। पर वहां भी उसने बीच का रास्ता निकाला। पार्टी के नेता संजय राउत ने गोलमोल बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भाजपा जिस राष्ट्रवाद की जो पढ़ाई पढ़ रही है शिव सेना को उसमें हेडमास्टर है। इसके बाद उसके सांसद सदन से वाकआउट कर गए।

शिव सेना ने खुद को भाजपा से ज्यादा राष्ट्रवादी बताया और सदन में कांग्रेस के साथ वोट भी नहीं किया। सो, अब कांग्रेस क्या करेगी? कांग्रेस के एक जानकार नेता ने कहा कि कुछ नहीं करेगी। कांग्रेस की पहली चिंता किसी तरह से भाजपा को रोकने की है। कर्नाटक के उपचुनाव में भाजपा की भारी भरकम जीत ने कांग्रेस का हौसला और तोड़ दिया है। इसलिए वह नहीं चाहेगी कि महाराष्ट्र में सरकार अस्थिर हो। इसका कारण यह है कि कांग्रेस को शिव सेना और एनसीपी दोनों को लेकर भरोसा नहीं बन पा रहा है।

इस बीच महाराष्ट्र में शिव सेना और भाजपा की दोस्ती वाला खेल शुरू हो गया है। शिव सेना के नेता और पहली बार 1995 में भाजपा और शिव सेना की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री बने मनोहर जोशी ने कहा है कि दोनों पार्टियां 30 साल तक अच्छी दोस्त रही हैं और आगे कभी भी साथ आ सकती हैं। दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने भी कहा कि दोनों पार्टियां कभी भी साथ आ सकती हैं। ध्यान रहे पाटिल को अमित शाह का करीबी नेता माना जाता है।

यह भी ध्यान रखने की बात है कि सरकार बनने के तुरंत बाद शिव सेना ने अपने मुखपत्र सामना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए लिखा कि मोदी और उद्धव भाई-भाई हैं। सामना के जरिए ही शिव सेना ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार के सचिवालय मंत्रालय के ऊपर भगवा झंडा लहराता रहेगा। तभी शिव सेना की आगे की राजनीति पर नजर रखने की जरूरत है, जो कि बहुत दिलचस्प होने वाली है। अगर कांग्रेस ने ज्यादा दबाव बनाया तो शिव सेना को भाजपा के साथ जाने में दिक्कत नहीं होगी।

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